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IIM Raipur में होगा फैकल्टी का टोटा

एक माह के भीतर पांच फैकल्टीज का छोडऩा आईआईएम की अध्ययन व्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा। फिलहाल डायरेक्टर स्तर पर इन फैकल्टीज के एक्सटेंशन को लेकर बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स को कोई अनुशंसा नहीं की गई है।

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Kanchan Jwala

Mar 08, 2016

IIM Raipur

IIM Raipur

रायपुर.
आईआईएम रायपुर में एक बार फिर पढ़ाई को लेकर संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। पहले से ही फैकल्टीज की कमी से जूझ रहे आईआईएम की पांच फैकल्टीज के कॉन्ट्रैक्ट अप्रैल में खत्म होने जा रहे हैं। एक माह के भीतर पांच फैकल्टीज का छोडऩा आईआईएम की अध्ययन व्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा। फिलहाल डायरेक्टर स्तर पर इन फैकल्टीज के एक्सटेंशन को लेकर बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स को कोई अनुशंसा नहीं की गई है।


आईआईएम रायपुर की स्थापना से लेकर अब तक लगभग दर्जन भर फैकल्टीज छोड़ गए। स्वीकृत पदों पर पर्याप्त भर्ती अब तक नहीं हो पाई। कॉन्ट्रैक्ट के भरोसे चल रहे आईआईएम के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा झटका होगा कि एक साथ चार फैकल्टीज के कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो रहे हैं। इनमें प्रो. अत्रीसेन गुप्ता, प्रो. उमेश बामेल, प्रो. देवदत्ता पॉल और प्रो. सत्यशिवा दास शामिल हैं।


नहीं कम हुई तनातनी

दरअसल, आईआईएम डायरेक्टर और वहां की फैकल्टीज के बीच लंबे समय से जारी तनातनी अब भी कम नहीं हुई। फैकल्टीज अक्सर डायरेक्टर पर तानाशाही का आरोप लगाते हैं, तो डायरेक्टर कहते हैं कि उनकी पत्नी प्रो. विनीता सहाय की वरिष्ठता से ईष्र्या के कारण फैकल्टीज एेसा आरोप लगाते हैं। इन दिनों फैकल्टीज और डायरेक्टर के बीच इस बात को लेकर तनाव जारी है कि बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स के लिए अब तक किसी भी फैकल्टीज का नाम नहीं भेजा गया, जबकि, सर्विस रूल में इसका स्पष्ट प्रावधान है। फैकल्टीज ने इस संबंध में डायरेक्टर को कई पत्र लिखे हैं, लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला है।


इसलिए नहीं मिल रहा एक्सटेंशन

सूत्रों का कहना है कि आईआईएम के डायरेक्टर प्रो. बीएस सहाय का खुद का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका है। वे इन दिनों एक्सटेंशन पर चल रहे हैं। छह माह का एक्सटेंशन अप्रैल में खत्म होगा। वे इन दिनों खुद के एक्सटेंशन के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स से जोर आजमाइश कर रहे हैं। इस बीच अगर फैकल्टीज छोड़ जाएंगे और आईआईएम की व्यवस्था प्रभावित होगी, तो ऐहतियातन प्रो. सहाय के कॉन्ट्रैक्ट को एक्सटेंशन मिलने में मदद मिलेगी।


कई फैकल्टीज भी दबी जुबान से यही बात कह रहे हैं। हालांकि डायरेक्टर
ऐसे
आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि आईआईएम में सारी प्रक्रिया विधिवत रूप से होती है। अध्ययन के लिए जो जरूरी व्यवस्थाएं हैं, उनके लिए बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स से पत्राचार जारी है।


आईआईएम भारत सरकार की संस्था है। यहां एेसी अनियमितताएं नहीं की जा सकती हैं। सब कुछ दस्तावेजों पर होता है। जिन लोगों को मेरी व्यक्तिगत छवि से परेशानी है, वे एेसा आरोप लगाते हैं। अध्ययन की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नेन्स के साथ पत्राचार जारी है।

प्रो. बीएस सहाय
, डायरेक्टर, आईआईएम रायपुर