27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फल-सब्जियों की लाइफ बढ़ाने में धांधली, आईएएस को दिया नोटिस

फल- फूल, सब्जी और कंदमूलों की लाइफ बढ़ाने के लिए एनर्जी कूल चेंबर की स्थापना में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद कृषि उत्पादन आयुक्त अजय सिंह ने आईएएस भुवनेश यादव को नोटिस थमा दिया है

3 min read
Google source verification

image

Chandu Nirmalkar

Sep 10, 2015

vegetables

vegetables

रायपुर.
फल- फूल, सब्जी और कंदमूलों की लाइफ बढ़ाने के लिए एनर्जी कूल चेंबर की स्थापना में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद कृषि उत्पादन आयुक्त अजय सिंह ने आईएएस भुवनेश यादव को नोटिस थमा दिया है। नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गाइड लाइन के अनुसार एनर्जी कूल चेंबर की स्थापना होती तो जरूरतमंद किसानों को लाभ मिलता लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और अनियमिता को बढ़ावा मिला।


यह है मामला

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत एनर्जी कूल चेंबर बनाने हेतु किसानों को अनुदान दिया जाता है। अनुदान की आधी रकम किसानों को वहन करनी होती है जबकि आधा व्यय बागवानी मिशन की ओर से वहन किया जाता है। वर्ष 2013-14 में एक चेंबर की स्थापना के लिए मिशन ने चार लाख का निर्धारण किया गया था जो 2015 में बढ़कर पांच लाख हो गया। इस योजना का लाभ उन किसानों को दिया जाना था जिनके पास अधिकतम चार हेक्टयेर की कृषि भूमि थी, लेकिन एक शिकायत के बाद जब मामले की छानबीन हुई तो पता चला कि किसानों की आड़ में कुछ ऐसे लोग कूल चेंबर का अनुदान हासिल करने में सफल हो गए हैं जो पात्रता नहीं रखते। फिलहाल योजना के तहत 928 को अनुदान दिया गया है इनमें से तीन सौ लोगों के यहां गड़बड़ी पाई गई है।


जांच में अनियमितता का खुलासा

इस मामले में एक आरटीआई कार्यकर्ता उचित शर्मा की शिकायत के बाद दो बार जांच करवाई गई। प्रारंभिक जांच में कृषि विभाग के तात्कालीन सचिव पीसी पाण्डेय ने यह पाया कि ग्राम मुर्रा के किसान रोहित सोनकर कूल चेंबर के लिए अलग से कोई भवन नहीं बनाया था। ग्राम रवेली के किसान ने कूल चेंबर की स्थापना तो की, लेकिन पड़ताल के दौरान यूनिट बंद मिली। इसी गांव के गोकुल निर्मलकर ने भी राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गाइडलाइन के अनुसार यूनिट स्थापित नहीं की। ग्राम ढोंढरा के दीपक महस्के और ग्राम दतरेंगा के शंभूलाल सोनकर की यूनिट भी जांच के दौरान सही नहीं पाई गई। सचिव ने अपनी पड़ताल में यह भी पाया कि किसानों ने जो उपकरण लगाए थे वे अलग-अलग थे। खरीदे गए उपकरणों की दर भी अधिक थी।


दूसरी जांच में भी गड़बड़ी

मामले की एक दूसरी जांच कृषि अभियांत्रिकी के अपर संचालक डीडी मिश्रा, वित्त विभाग के अपर संचालक सतीश पाण्डेय और राज्य कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान के सीएल जैन की समिति ने की। इस समिति ने गरियाबंद जिले के ९ कृषकों के आवेदनों की पड़ताल में ही कई तरह की अनियमिता पाई। समिति को कृषक पूनाराम सोनकर और पवन सोनकर के यहां संयंत्र बंद मिला। पूनारद सोनकर और चंद्रशेखर हरी के यहां संयंत्र गायब मिला। तो कृषक सुनील सुनील नागरची के संयंत्र के सभी उपकरण अलग-अलग मिले। समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा कि अनुदान प्रकरण के लिए सही ढंग से परियोजना तैयार नहीं की गई थी। किसान कितना व्यय करेगा यह सुनिश्चित नहीं किया गया और ज्यादातर जगहों पर संयंत्र कार्यशील नहीं पाया गया।


यह मामला प्रदेश के किसानों से जुड़ा है इसलिए इसे सामान्य गड़बड़ी मानना ठीक नहीं है। पूरे मामले में आईएएस अफसर भुवनेश यादव ने अपने जान-पहचान वालों को लाभ दिलवाया है। यह मामला गंभीर किस्म के आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है। योजना को सफल बनाने के लिए किसानों के खातों में अनुदान की राशि जमा की जानी थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।


ये भी पढ़ें

image
उचित शर्मा, आरटीआई कार्यकर्ता

यह सही है कि मुझे नोटिस मिला है, लेकिन मेरी ओर से नोटिस का जवाब दे दिया गया है। हकीकत यह है कि मैंने उद्यानिकी विभाग के संचालक के तौर पर एक मई 2013 को कार्यभार संभाला था। मुझसे पहले आलोक कटियार और डीडी सिंह बतौर संचालक काम कर चुके थे। मैंने अपने कार्यकाल में नियम और कानून का ध्यान रखकर कार्रवाई संपादित की है। जो भी गड़बड़ी हुई है उसमें मेरा कोई रोल नहीं है।

संबंधित खबरें

भुवनेश यादव, तत्कालीन संचालक

(राजकुमार सोनी)