केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित जिलों में पुलों की स्थिति पर एक वृहद सर्वे कराने का निर्णय लिया है। एेसे में माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई आसान हो जाएगी।
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित जिलों के दूर-दराज गांव में संपर्क सड़कों पर पुलों के नहीं होने के कारण सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब उनकी यह मुश्किल खत्म होने जा रही है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्य के माओवाद प्रभावित जिलों में पुलों की स्थिति पर एक वृहद सर्वे कराने का निर्णय लिया है। क्योंकि अक्सर यह खबर मिलती है कि माओवादी इलाकों में सड़कों पर पुल नहीं होने के कारण माओवादी सुरक्षा बलों को चकमा देकर भाग खड़े होते हैं। अब भविष्य में माओवादियों को केवल पुल के नहीं होने पर सुरक्षा बलों को चकमा देना आसान नहीं होगा।
मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक माओवाद प्रभावित जिलों में सर्वे फरवरी के आखिरी हफ्ते में शुरू होने की उम्मीद है। मंत्रालय छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अन्य दस माओवाद प्रभावित राज्यों के दूर-दराज ग्रामीण इलाकों में भी पुलों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटा रहा है।
जल निकासी भी होगी सुनिश्चित
जानकारी के मुताबिक अब सड़कों पर बनने वाली पुलियों के आर-पार बकायदा जल निकासी सुनिश्चित की जाएगी। अब तक होता ये आया है कि पुलिया तो बना दी जाती थी, लेकिन जल निकासी नहीं होने के कारण बारिश में पुलिया ढह जाता था। पुलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरीय निगरानी प्रणाली तैयार की गई है।
पुल के साथ सड़कों का भी निर्माण
मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ सहित देश के दस माओवाद प्रभावित राज्यों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत संपर्क सड़कों पर टूटी पुलियों का न केवल पुननिर्माण कराएगा, बल्कि ऐसे जिलों में रहने वालों को बारहमासी सड़क भी उपलब्ध कराएगा।
मंत्रालय अपने सर्वे में इस बात की भी जानकारी जुटाएगा कि राज्यों के माओवाद प्रभावित जिलों में माओवादियों द्वारा पुलों को तोडऩे की अब तक क्या स्थिति रही है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कई राज्य सरकारों ने माओवाद प्रभावित जिलों में पुलों का निर्माण समय-समय पर कराए हैं, लेकिन माओवादी अपनी सुरक्षा के चलते इन पुलों को तोड़ देते हैं, ताकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई से अपने को बचा सकें।