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PMT हॉस्टल में तड़पती रही छात्रा, वार्डन गायब, आधी रात स्कूटी में ले गए अस्पताल

स्टूडेंट्स ने वार्डन को कई बार कॉल करके सूचित करना चाहा, लेकिन उन्होंने नही उठाया। स्टूडेंट्स ने बीमार स्टूडेंट उजियाली कुजूर को एक स्कूटी में बैठाकर जीई रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाया।

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Chandu Nirmalkar

Sep 15, 2016

Raipur girls hostel

Raipur girls hostel

विनोद डोंगरे/रायपुर.
राजधानी के पंडित रविशंकर यूनिवर्सिटी कैम्पस
में स्थित गल्र्स ट्राइबल हॉस्टल की एक स्टूडेंट आधी रात को बीमार पड़ गई।
हॉस्टल की वार्डन लता गोयल उस कैम्पस में निवास नहीं करती। स्टूडेंट्स ने
वार्डन को कई बार कॉल करके सूचित करना चाहा, लेकिन उन्होंने नही उठाया।
ट्राइबल डिपार्टमेंट के अधिकारियों को भी कॉल किया गया, लेकिन किसी ने जवाब
नहीं दिया। तब स्टूडेंट्स ने बीमार स्टूडेंट उजियाली कुजूर को एक स्कूटी
में बैठाकर जीई रोड स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाया।


यूं इकट्ठा की रकम

प्राइवेट
हॉस्पिटल होने के कारण वहां एडमिशन से लेकर दवाई तक हर चीज के लिए पैसों
की जरूरत पड़ी, तब गल्र्स ने आपस में सौ-सौ, दो-दौ सौ रुपए इक_े किए और ब
ीमार उजियाली को भर्ती कराया। रात तीन बजे उल्टी और दस्त शुरू हुआ था। सुबह
पांच बजे तक उजियाली की हालत काफी गंभीर हो चुकी थी।


आखिर कौन है वार्डन लता गोयल ?

पिछले
कई सालों से इसी हॉस्टल में पदस्थ वार्डन लता गोयल की इससे पहले भी
शिकायतें हो चुकी हैं। लगभग दो माह पहले भी एक छात्रा की तबीयत इसी तरह
बिगड़ी थी, तब भी दूसरी छात्राओं ने ही आपस में मिलकर अस्पताल पहुुंचाया
था। तब कलेक्टर ओपी चौधरी के निर्देश पर असिस्टेंट कमिश्नर (ट्राइबल) आरके
सिदार ने उस हॉस्टल में जाकर मामले की जांच की थी और वार्डन की गलती भी
पकड़ ली थी। इसके बावजूद वार्डन को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। वार्डन
नहीं सुधरी। कैम्पस में रहना छोड़कर वह बाहर रहती हैं, इसीलिए स्टूडेंट्स
को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।


"पत्रिका" को दी सूचना

अपने
वार्डन, अधिकारियों को फोन लगा-लगाकर थक चुकीं छात्राओं को जब कहीं से भी
रिस्पॉन्स नहीं मिला, तो उन्होंने "पत्रिका" को सूचना दी। मौके पर पहुंचे
"पत्रिका" संवाददाता ने इसकी सूचना अधिकारियों को देने के लिए कॉल किया,
लेकिन सुबह तक अधिकारियों ने फोन रिसिव नहीं किया। लेकिन विभाग के मंत्री
केदार कश्यप ने सबसे पहले मैसेज का रिप्लाई किया और अधिकारियों से बातचीत
की, तब कहीं जाकर अधिकारियों ने स घटना की सुध ली। सुबह लगभग 10 बजे वार्डन
भी अस्पताल पहुंची।


क्या कहते हैं मंत्री और अफसर

इस संबंध में "पत्रिका" ने जब आदिम जाति कल्याण विभाग के मंत्री केदार कश्यप से बातचीत की। उन्होंने कहा कि

अधिकारियों
को इस मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के आयुक्त चंद्रकांत
उइके ने भी तुरंत कार्रवाई की बात कही है। असिस्टेंट कमिश्नर आरके सिदार ने
स्वीकार किया कि इससे पहले की शिकायतों में सही पाए जाने के बाद भी वार्डन
लता गोयल को छोड़ दिया गया था, जिसके कारण वह बेखौफ हो गई है। उन्होंने
कहा कि मामले की जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी।

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