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बिना आंखों के CBSE में रच दिया इतिहास, दिव्यांग तेजल अब पढ़ेंगी DU में

दृष्टिबाधित होने के बावजूद सीबीएसई पैटर्न में पूरे छत्तीसगढ़ में 12 वीं की परीक्षा में टॉप करने वाली तेजल को अब डीयू (दिल्ली विश्वविद्यालय) में प्रवेश मिल चुका है

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Surya Pratap Goutam

Jul 03, 2016

Tejal Patel

Tejal Patel

रायपुर.
इंसान के हौसले बुलंद हों, तो भी कामयाबी की राह में शारीरिक खामियां आड़े नहीं आतीं। अगर मंजिल हासिल करने के लिए जज़्बा कायम हो, तो सचमुच पूरी कायनात इंसान के साथ होती है। इस लाइन को एक बार फिर सच कर दिखाया शहर की होनहार तेजल पटेल ने। दृष्टिबाधित होने के बावजूद सीबीएसई पैटर्न में पूरे छत्तीसगढ़ में 12 वीं की परीक्षा में टॉप करने वाली तेजल को अब डीयू (दिल्ली विश्वविद्यालय) में प्रवेश मिल चुका है। अब वह दिल्ली में सोशियोलॉजी (ऑनर) की पढ़ाई करेगी। तेजल छत्तीसगढ़ की संभवत: पहली होनहार प्रतिभा है, जिसने शारीरिक चुनौती के बावजूद देश के एक बड़े शैक्षणिक संस्थान तक का सफर पूरा कर लिया।


मुसीबतों का किया सामना

तेजल ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई ब्रेल लिपि सीखने के कारण हिंदी माध्यम से किया। उनके अभिभावकों ने तेजल को मठपुरैना स्थित दृष्टि श्रवण बाधित स्कूल में दाखिला कराया। बाद में अभिभावकों को एक विदेशी कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर मंगाया, जिसके जरिए दृष्टिबाधित ब'चे की पढ़ाई भी लैपटॉप से हो सकती है। लेकिन नौवीं कक्षा से सीबीएसई पैटर्न और अंग्रेजी माध्यम में तेजल को दाखिला देने के लिए शहर के तमाम बड़े स्कूल तैयार नहीं थे। अंतत: एनएच गोयल स्कूल में तेजल को दाखिला मिला। वहां से तेजल ने अ'छे माक्र्स से पास किए। 12 वीं में तो वह 94 प्रतिशत अंकों के साथ पूरे प्रदेश की मेरिट में रही।


मेरे जैसों के लिए कुछ करना चाहती हूं: तेजल

तेजल अपनी कामयाबी का श्रेय टीचर्स, पैरेन्ट्स को देते हुुए कहती हैं कि उनके घर आकर ट्यूशन देने वाली पल्लवी शर्मा ने उन्हें एनसीईआरटी के हिसाब से कंटेन्ट सेलेक्ट करने और उसकी तैयारी कराने में काफी मदद की। जिसके कारण उन्हें सीबीएसई जैसे हार्ड कम्पीटिशन वाले एक्जाम में अ'छी कामयाबी मिल सकी। तेजल कहती है, कि वह अपने कॅरियर बनाने के साथ-साथ एेसे लोगों की मदद करना चाहती है, जो शारीरिक रूप से बाधित जरूर होते हैं, लेकिन उनके भीतर प्रतिभाएं भी होती हैं। जो संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाते।