दलालों ने अपने काम के तौर तरीकों में बदलाव कर लिया है। पहले लड़के-लड़कियों को बसों और ट्रेनों से मेट्रो शहरों में भेजा जाता था। अब इसके लिए छोटे वाहनों का इस्तेमाल किया जाने लगा है। शातिर ढंग से काम करते हुए एजेंसियां लड़के-लड़कियों को जींस, टीशर्ट, नाइट ड्रेस, मोबाइल और रिचार्ज जैसी सुविधाएं दे देते हैं, जिससे उनकी चमक-दमक को देखकर और लोग भी गांव से जाने के लिए आकर्षित हों। गांवों में धर्म-जाति और समुदाय विशेष की उपलब्धता के आधार पर विजिटिंग का वितरण किया जा रहा है, जिससे लोगों में यह संदेश जाए कि एजेंसियां अच्छे काम कर रही हैं।