देवउठनी एकादशी के दिन क्यों होता है भगवान विष्णु का तुलसी से विवाह
छोटी दिवाली के रूप में धूमधाम से उत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए महिलाएं घर-घर तुलसी स्थान को चमकाएंगी और माता तुलसी का भगवान शालीग्राम से धूमधाम के साथ विवाह करेंगी।
रायपुर. शहर में छोटी दीपावली जैसा माहौल दिखने लगा है। शहर के चौक-चौराहों पर गन्ने और पूजन सामग्री की दुकानें सज चुकी है। शुक्रवार को धूमधाम से तुलसी विवाह का धूमधाम से मनाया जाएगा। गोधूली वेला में घर-आंगन दीपमालाओं से दमकेंगे, द्वार-द्वार रंगोली सजेगी। छोटी दिवाली के रूप में धूमधाम से उत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए महिलाएं घर-घर तुलसी स्थान को चमकाएंगी और माता तुलसी का भगवान शालीग्राम से धूमधाम के साथ विवाह करेंगी।
चार माह से बंद शुभ मुहूर्त शुक्रवार से शुरू हो जाएंगे। शादी और मांगलिक कार्य होंगे। पौराणिक मान्यता है कि चातुर्मास काल में भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते रहे और उन्हें जप, तप और आराधना कर जगाया जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर प्रबोधन मंत्रोच्चार कर भगवान को नींद से जगाया जाता है।
इसलिए होता है भगवान विष्णु का तुलसी से विवाह
आज साल की सबसे बड़ी एकादशी है। ये दिन शादियों के लिए बेहद ही शुभ माना जाता है] क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह होता है। लेकिन तुलसी का विवाह भगवान विष्णु की किसी मूर्ति के साथ नहीं बल्कि श्राप के कारण पत्थर बन चुके शालिग्राम से होता है। ये भगवान विष्णु का कोई अवतार नहीं है, बल्कि श्राप है जिसके कारण उन्हें शालिग्राम का रूप मिला। यह श्राप इतना शक्तिशाली था जिसने भगवान विष्णु को पत्थर में बदल दिया। यह उन्हें स्वीकार करना पड़ा क्योंकि यह उनकी सबसे प्रिय भक्त वृंदा ने उन्हें दिया था।
अबूझ मुहूर्त होंगे विवाह
पंडित मनोज शुक्ल ने बताया कि देवउठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन विवाह और मांगलिक कार्य के लिए सबसे शुभ दिन होता है। शादी-विवाह के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं है। लेकिन विवाह का मुहूर्त 16 नवंबर से शुरू हो रहा है। इसके बाद लगातार विवाह के मुहूर्त है।
सबसे श्रेष्ठ एकादशी
पं. शुक्ल के अनुसार कार्तिक मास स्नान-दान के लिए महत्व रखता है। साल में पडऩे वाली 24 एकादशी में से कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी भगवान को जागृत करने की तिथि होती है, जो व्रत पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी गई है।
गन्ने की दुकानें सज गई
शहर के चौक-चौराहों पर गन्ने की दुकानें सज गई है। इसके अलावा आंवला, शकरकंद, पुष्प, आंवला, सिंघाड़ा, बेर आदि चीजों की दुकानें भी लगी हैं। गन्ने की दुकानों पर लोगों की जबरदस्त भीड़ देखी गई।