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मरघट में महिलाएं नग्न होकर शव साधना कर सीखती हैं कालाजादू

छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में तंत्रमंत्र और झाडफ़ूंक आज भी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। यहां के गांवों में आज भी टोनही जैसी प्रथा में लोगों का अटूट विश्वास है

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deepak dilliwar

Jul 06, 2016

tonhi

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रायपुर.
छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में तंत्रमंत्र और झाडफ़ूंक आज भी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। यहां के गांवों में आज भी टोनही जैसी प्रथा में लोगों का अटूट विश्वास है। गांव में जब भी कोई बीमारी फैल जाए, खेती में नुकसान हो जाए, किसी परिवार में सदस्य की मौत हो जाए या गांव में कुछ भी अपशगुन जैसा हो जाए तो इसे टोनही का प्रकोप बता कर तंत्र मंत्र का उपयोग किया जाना आम बात है। गांव के गुनिया पंडा दावा करते हैं कि मंत्रोच्चार का उपयोग कर बता सकते हैं कि कौन सी महिला टोनही है जिसने काला जादू किया है। ग्रामीण भक्तों को भी इन गुनिया पंडों पर इतनी श्रद्धा होती है वे उस महिला को टोनही मानकर तमाम नुकसान के लिए उसे ही जिम्मेदार मान लेते हैं।


काला जादू जानने वाली होती है टोनही

टोना- टोटका शब्दों का उपयोग किसी चमत्कार की उम्मीद से किए गए उपाय के लिए किया जाता है। नुकसान पहुंचाने की नीयत से किए जाने वाले कार्य को टोना कहते हैं। वहीं आमतौर पर संभावित नुकसान से बचने के लिए किए गए उपाय को टोटका कहते हैं। दानों स्थितियों में जो उपाय किए जाते हैं वे तंत्र मंत्र या पूजा पाठ जैसी साधना पर आधारित होते हैं इस तरह टोनहीं शब्द का स्त्री रूप है।


एेसे बनती है टोनही

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी यह मानते है कि महिलाएं तंत्रमंत्र का उपयोग कर टोनही बनती हैं। लोक संस्कृतिकार डॉ विजय चौरसिया ने बताया कि एेसी मान्यता है कि पुरूष गुनिया की तरह ही महिलाएं भी गुनाई जानती हैं। उनमें टोनही भी होती हैं। जिस महिला को टोनही विद्या सीखनी होती है वह रात में मरघट जाती है। वहां मृत किसी महिला अथवा बच्चे के शव को बाहर निकालती है। उस समय वह निर्वस्त्र रहती है। अपने ही मल से स्थान को लीपती है। वहां एक जलता हुआ दीपक रखती हैं। वे इस बात का जरूर ध्यान रखती हैं कि इस मंत्र क्रिया को कोई देख न पाए। यदि किसी ने देख लिया तो उसकी सिद्धी पूरी नहीं होती है। मंत्रों के माध्यम से वह मृतक की आत्मा को जगाती है। इस तरह वे निरंतर इस क्रिया को करते करते पारंगत टोनही बन जाती हैं। कहते हैं कि एेसी महिलाएं किसी जिंदा आदमी का खून भी चूस सकती हैं।


गांव में बैगा बताते हैं टोनही का राज

दुलार बैगाा भूत प्रेत, डायन, टोनही के प्रकोप से बचाने का दावा करता है। यह भी बताया कि हरियाली अमावश्याा के दिन पूरे गांव को मंत्रो से बांध दिया है यहां अब टोनही डायन या भूत प्रेत का कोई असर नहीं होगा। हर एक गांव में दो तरह के बैगा होते है।


शेरगांव के दुलार बैगा के अनुसार बैगा का मतलब होता है धार्मिक और तंत्रमंत्र के अनुष्ठान के जानकार। मैं देवभोग बैगा हूं विभिन्न त्यौहारों में पूजा पाठ कराता हूं। पूर्णिमा और अमावश्या में गांवको मंत्रोच्चार से बांधता हूं,ताकि टोनही, भूतप्रेत का प्रभाव कमहो सके।


झाड़ फूंक के जानकार चैतु बैगा का कहना है कि मैंने तंत्रमंत्र की सिद्धी हासिल की है। जिसे भी डायन, भूतप्रेत लगते हैं तो मंत्रों का उपयोग करके समझ जातेहैं। इसी तरह टोनही भी सिद्धी हासिलकरती हैं। टोनही की हरियाली अमावश्या के दिन सिद्धी पूरी होती है। उनके मंत्र इतने छोटे होते हैं कि वो कही भी पढ़कर जादू टोना कर सकती हैं।


स्वार्थ के लिए बनाते हैं टोनही

अंध श्रद्धा निर्मलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्रा के अनुसार प्रदेश में टोनही प्रताडऩा के मामलों में यह देखा गया है कि कभी भी सभ्रांत और सामथ्र्यवान परिवार की महिलाओं पर टोनही होने का आरोप नहीं लगाया गया है। जबकि गरीब,असहाय, विधवा, निराश्रित, वृद्ध महिलाएं ही टोनही प्रताडऩा का शिकार हुई हैं। समाज के कथित बदनियत लोगों के द्वारा कमजोर महिलाओं को टोनही बता दिया जाता है। टोनहीं मामलों की पड़ताल से यह साबित होता है कि महिलाओं पर लगे आरोप अंधविश्वास या निजी स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए लगाए गए हैं। जमीन जायदाद हड़पने या गलत मंशा को पूरा करने के इरादे से भी महिलाओं को टोनही बता दिया जाता है।


टोनही निवारण के लिए बना कानून बेअसर

छत्तीसगढ़ सरकार ने टोनही प्रताडऩा निवारण अधिनियम - 2005 बनाकर महिलाओं के संरक्षण में ठोस पहल की। इस कानून के तहत आरोपियों को 5 साल का कारावास के साथ ही जुर्माने का भी प्रावधान है। टोनही की पहचान करने पर, टोनही को प्रतिडि़त करने पर अभिकथित उपचार करने पर, टोनही होने का दावा करने के लिए, अपराध कारित करने के प्रयास करने पर कठोर कार्रवाई के लिए यह कानून बना है। इसके अलावा अपराध का संज्ञेय तथा अजामानतीय होना- दंड प्रकिया संहिता 1973(1974 का संख्याक 2)में अंतर्विष्ट किसी अन्य बात पर। यह तमाम कानून तो बनाए गए पर ये कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। इस कानून व्यापक प्रचार प्रसार व समाज में जागरूकता लाने की ओर ध्यान देना होगा।

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