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36 साल पहले जब छात्र ने तीन सवालों का दिया था सिर्फ एक जवाब, ठहाका मार कर हंस पड़े थे राजीव

देश के छठवे प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भारतीय सेना का विशेष विमान छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले दुगली गांव के कौहाबाहरा में अस्थायी तौर पर बनाए गए हेलीपैड में 14 जुलाई 1985 को सुबह लगभग 10.30 बजे उतरा था ।  

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36 साल पहले जब छात्र ने तीन सवालों के दिए थे सिर्फ एक जवाब, ठहाका मार कर हंस पड़े थे राजिव

36 साल पहले जब छात्र ने तीन सवालों के दिए थे सिर्फ एक जवाब, ठहाका मार कर हंस पड़े थे राजिव

रायपुर. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले दुगली गांव के लिए 14 जुलाई 1985 वो दिन था, जब उनका गांव इतिहास के पन्नो में अमर हो गया । इसी दिन देश के छठवे प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपनी पत्नी पत्नी सोनिया गांधी के साथ दुगली गांव पहुंचे थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भारतीय सेना का विशेष विमान दुगली के कौहाबाहरा में अस्थायी तौर पर बनाए गए हेलीपैड में सुबह लगभग 10.30 बजे उतरा था ।

उसके साथ उनकी पत्नी सोनिया गांधी के अलावा अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री मोतीलाल वोरा, पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह,अविभाजित रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री एवं कसडोल विधायक डॉ. कन्हैयालाल शर्मा और सांसद एवं संत कवि श्री पवन दीवान, तत्कालीन अविभाजित रायपुर जिले के कलेक्टर श्री रणवीर सिंह भी मौजूद थे।

क्या आप जानते हैं राजीव गांधी का असली नाम क्या था?

राजीव ने पलाश के पत्ते चखा कुल्थी बीज की दाल और चरोटा भाजी का स्वाद

इस दौरान उन्होंने दुगली गांव के कमार जनजाति की संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान और वेशभूषा आदि को जानने के साथ ही उनके समस्याओं को भी जानने का प्रयास किया । उन्होंने पलाश के पत्ते से बनाए गए दोने में मड़िया पेज, कडू कंद, कुल्थी बीज की दाल और चरोटा भाजी का स्वाद भी चखा। साथ ही महुए के एक फूल को लेकर उसके रस का भी स्वाद लिया था।

जब गांव के छात्र ने दिया तीन सवाल का एक जवाब

राजीव गांधी अपनी इस यात्रा के दौरान दूगली गावं के प्राथमिक स्कूल भी गए थे जहां उन्होंने छात्रों को चॉकलेट बाटा था । इसदौरान उन्होंने एक छात्र से उसका काम, कक्षा और उसके गांव का भी नाम पूछा । छात्र ने बड़ी मासूमियत के साथ उनके तीनो प्रश्न के एक ही जवाब दिया- "दुगली" । छात्र का ये जवाब सुनकर राजीव ठहाका मार कर हंस पड़े थे।

आज भी बदहाल है राजीव का गोद लिया गांव दुगली

लगभग 36 साल पहले राजीव गांधी ने जब दुगली गांव को गोद लिया तो ग्रामीणों में ये आस जगी थी की उनके बदहाली के दिन अब खत्म हो जायेंगे लेकिन आजतक ना तो गाव का विकास हुआ और ना ही स्कूल की बदहाली ही दूर हो पायी है।

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