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पाकिस्तान की सरहद से भाई को खींच लाया बहन का प्यार, मिलते ही छलक पडे़ं आंसू

महेश रहेजा पाकिस्तान में रहते हैं शादी भी वहीं की उनकी तीन बहनें हैं जिसमें से दो इंदौर और एक रायपुर में हैं

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raksha bandhan

पाकिस्तान की सरहद से भाई को खींच लाया बहन का प्यार, मिलते ही छलक पडे़ं आंसू

रायपुर. रविवार को सावन का आखिरी दिन रहा और दिनभर बारिश होती रही। इस बीच रक्षाबंधन के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। टेक्नोलॉजी ने दूरियों को समेट दिया है, इसलिए तो दूर देश के बहनें अपने भाइयों को वर्चुअल राखी बांधते नजर आईं। वैसे तो राजधानी में ऑनलाइन राखी बांधने के कई उदाहरण मिले लेकिन हमें जो फोटो प्राप्त हुई है वह डेनमार्क की है। रायपुर निवासी चुन्नीलाल शर्मा की बेटी विपाशा की शादी डेनमार्क में हुई है। उन्होंने भाई विराट को वीडियो कॉलिंग से वर्चुअल राखी बांधकर सरप्राइज दिया। विपाशा ने बताया कि टेक्नोलॉजी ने इमोशन को ऑब्जर्व कर लिया है। इसलिए दूर बैठकर भी एेसा लगता नहीं कि वाकई दूर में हैं। लिहाजा मैंने तय किया कि इस बार ऑनलाइन ही आरती उतारूंगी, टीका लगाऊंगी और राखी बांधना है।

ये कहानी है महेश रहेजा की। वे पाकिस्तान में रहते हैं। शादी भी वहीं की। उनकी तीन बहनें हैं जिसमें से दो इंदौर और एक रायपुर में हैं। वे दो दशक से हिंदुस्तान आने के लिए तरस रहे थे, लेकिन किसी वजह से वीजा नहीं मिल रहा था, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कोशिश जारी रखी।

आखिरकर वीजा मिल गया। वे रायपुर आ गए। जब उनकी दो बहनें सरला हरगुनानी और निर्मला कटारिया को पता चला तो वे भी अपनी बहन सरोज जोतवानी के घर पति के साथ आईं। यहां भावनाओं का ज्वार उमड़ पड़ा। बरसों बाद महेश ने बहनों से राखियां बंधवाई तो सभी की आंखें छलक पड़ीं। सरला, निर्मल और सरोज ने कहा कि ईश्वर ने हमारी पुकार सुन ली। इस बार की राखी ताउम्र याद रहेगी। महेश ने बताया कि वीजा के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। पाकिस्तान में यदि कोई भारतीय शादी करता है तो उसे इंडिया का वीजा मिलने के लिए इंक्वारी संबंधी काफी परेशानी होती है। इंडियन एंबेसी में भी पाकिस्तान के अफसर शिफ्ट वाइस बैठते हैं। लेकिन मेरी किस्मत और इन बहनों का प्यार था जो मैं यहां आ सका। सच कहूं तो इंसान के बस में कुछ नहीं है, लेकिन समर्पण भाव से कोशिश की जाए तो कामयाबी जरूर मिलती है।

सिटी की मनीषा चेतन तारवानी खुद को खुशकिस्मत मानती हैं और माने भी क्यों नहीं। उनके सात भाई हैं और सभी मुंबई में रहते हैं। राखी के मौके पर सभी साथ थे। मनीषा ने बड़ी सी थाल लेकर सभी की एक साथ आरती उतारी। यह नजारा देखने लायक था। एक-एक कर टीका लगाया और राखियां बांधीं। मनोहरलाल वाधवा, रामचंद्र साईं, नारायण दास, महेश कुमार, अमर कुमार, राजेश कुमार, प्रदीप कुमार ने बताया कि हमें भी बहुत खुशी हुई कि हमारी एक बहन है और राखी के दिन हम साथ रहे।