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Rashtriya Balika Diwas 2023 : छत्तीसगढ़ की बेटी ने क्राउड फंडिंग से बचाई पिता की जान, आज बेटे से बढ़कर निभा रहीं जिम्मेदारी….ये बेटियाँ भी कम नहीं

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत 24 जनवरी 2008 से हुई। इसके बाद से लगातार प्रत्येक वर्ष २४ जनवरी को पूरे देश में बालिका दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बालिकाओं के साथ किसी प्रकार का भेद न हो और उन्हें शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में आगे बढऩे का पर्याप्त अवसर मिले।

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Rashtriya Balika Diwas 2023  : छत्तीसगढ़ की बेटी ने  क्राउड फंडिंग से बचाई पिता की जान, आज बेटे से बढ़कर निभा रहीं जिम्मेदारी....ये बेटियाँ भी कम नहीं

जांजगीर में आत्मरक्षा के गुर सीखतीं बालिकाएं और रायपुर की प्रोफेसर गीतिका ब्रह्मभट्ट

रायपुर . आज देश में राष्ट्रीय बालिका दिवस Rashtriya Balika Diwas 2023) रहा है । इस मौके पर एक बेटी के हौसले और जिम्मेदारी की कहानी साझा कर रहे हैं। वह अपने पैरेंट्स की एकमात्र संतान है। पैरेंट्स को कभी बेटे की जरूरत महसूस नहीं कराई क्योंकि माता-पिता ने ही कभी उसे लड़की होने का अहसास नहीं कराया। निजी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर गीतिका ब्रह्मभट्ट के पिता प्रमोद ब्रह्मभट्ट को एक ऐसी बीमारी हो गई थी जिसमें बॉडी के सेल्स में प्रोटीन की परत जम जाती है। ऐसे में बॉडी मुव नहीं कर पाती और सिर्फ गर्दन में ही हरकत होती थी। जान बचाने के लिए ऑपरेशन करना था। गीतिका ने अपने दोस्त की मदद से क्राउड फंडिंग की। इसके अलावा जहां-जहां मदद मिल सकती थी, कोशिश करती रहीं। ऑपरेशन के लिए पैसे इकट्ठे हुए और अंतत: सवा महीने बाद पिता को नवजीवन मिला।

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पैरेंट्स बोझ नहीं होते

जो लोग पैरेंट्स को बोझ समझते हैं, उनमें अब तक मैच्योरिटी नहीं आई है। पैरेंट्स तो जिम्मेदारी हैं और होनी भी चाहिए। जिन्होंने इतने साल अपनी जिंदगी आपके नाम कर दी, उनकी सुख-सुविधा के लिए इतना करना तो फर्ज है हमारा।

कम नहीं हुआ बेटा-बेटी में भेद

समाज में लड़के-लड़की का भेद हर बार महसूस होता है। जब मैं दूसरों के पैरेंट्स को देखती हूं वे अपनी काबिल बेटी को बेटे की तुलना में कम आंका जाता है। मैं कई ऐसी होनहार बच्चियों को जानती हूं जो पढ़ाई व अन्य क्षेत्र में बहुत अच्छी हैं। लेकिन उनके पैरेंट्स तू लड़की है, एक दिन शादी के बाद जाएगी ही। हमारे क्या काम आएगी। ऐसा कहकर उसके सपनों को कुचल देते हैं। भेदभाव को खत्म करने की शुरुआत घर से ही करनी होगी।

बेटियां सीख रहीं आत्मरक्षा के गुर

भारत सरकार ने बालिकाओं को आत्मरक्षा का गुण सिखाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत देश की सभी बालिकाओं को अपनी सुरक्षा के लिए तैयार करना ही सरकार का लक्ष्य है। मौजूदा समय में कार्यक्रम देश के विभिन्न जिलों में चलाया जा रहा है। बालिकाओं की सुरक्षा एक चिंता का विषय बन गया है। कराते संस्था के द्वारा बेटियों को सशक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बम्हनीडीह ब्लाक के हाईस्कूल बोरसी, हाईस्कूल सिलादेही, हाईस्कूल बिर्रा में कराटे मास्टर यज्ञनारायण साहू एवं लोचन द्वारा बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे है।

दीपका की अनामिका ने एक गोल्ड सहित तीन पदक जीता
भारतीय वुडबॉल संघ एवं महाराष्ट्र वुडबॉल संघ के तत्वधान में नागपुर के ग्रैंड महाराज लॉन एवं रिसोर्ट में नेशनल विंटर लीग 12-15 जनवरी के मध्य सम्पन्न हुई। जहाँ देश भर के 12 से अधिक टीमों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया तथा वहाँ के खिलाडिय़ों ने अपना दम दिखाया। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की टीम ने भी भाग लिया था। महिला वर्ग में गेवरा निवासी अनामिका शुक्ला ने 3 पदक जीतकर अपना परचम लहराया है। अनामिका महिला वर्ग के डबल्स में स्वर्ण पदक, सिंगल इवेंट में काँस्य पदक एवं मिक्स डबल्स प्रतिस्पर्धा में काँस्य पदक अर्जित किया।