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श्वान को घरों से दूर रखने लाल-केसरिया पानी की बोतल बाहर लटका रहे लोग

- लोगों का मानना ; लाल रंग देखकर घर के सामने श्वान नहीं करते गंदगी

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श्वान को घरों से दूर रखने लाल-केसरिया पानी की बोतल बाहर लटका रहे लोग

श्वान को घरों से दूर रखने लाल-केसरिया पानी की बोतल बाहर लटका रहे लोग

दिनेश यदु @ रायपुर. आवारा श्वानों की गंदगी से परेशान लोगों ने अब अपने घरों के बाहर लाल व केसरिया रंग का पानी भरकर रखना शुरु कर दिया है, लोगों का ऐसा मानना है कि इससे घरों के सामने श्वान गंदगी नहीं फैला रहे। शहर के कई मोहल्ले व कॉलोनी में बड़ी तेजी से बोतल रखने का प्रचलन शुरू हो गया है। शहर के मठपारा, गभरापारा, सुंदरनगर, शंकर नगर अमलीडीह सहित कई क्षेत्रों में प्रत्येक घर के सामने पानी की बोतल में लाल कलर से भरी पानी की बोतल टांगी जा रही है। इसका चलन इतना जोर पकड़ने लगा है कि लोग घर-घर इस्तेमाल करने लगे हैं।

बुजुर्गों की सलाह पर रख रहे बोतल

गभरापारा निवासी आयुष कुमार यादव ने बताया कि हमारे मोहल्ले में आवारा श्वान झुंड में है, घर के सामने गंदगी करने के साथ नाली का कचरा भी उठाकर घर के सामने रख देते हैं। पुराने बुजुर्गों की सलाह पर लाल कलर पानी बोटल में भरकर घर के सामने लटका दिया है, तब से श्वान गंदगी नहीं कर रहे हैं।

बोतल रखना टोटका नहीं विज्ञान

मठपारा निवासी राकेश यादव ने बताया कि अपने घरों के बाहर बोतल में लाल, नीले या हरे रंग का पानी भरकर रखते हैं। उसके पीछे कोई टोटका नहीं, बल्कि विज्ञान है। जब उनके सामने लाल, नीला या हरा रंग आता है तो उन्हें वो रंग दिखाई नहीं देता है। इस कारण से वो परेशान हो जाते हैं और उस स्थान को छोड़ने में ही अपनी भलाई समझते हैं।

पेट्रोल समझकर भागते हैं

सुंदरनगर निवासी अभिनव शुक्ला ने बताया कि लाल रंग के पानी में जादू है जो घर के सामने लटकाने से आवारा श्वान द्वारा गंदगी रूक जाती है, क्योंकि श्वान लाल रंग को पेट्रोल समझकर भागते हैं।

कलर ब्लाइंड होते हैं श्वान

वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि जिस तरह कुछ मनुष्य कलर ब्लाइंड होते हैं, उसी तरह श्वानों को नीले, हरे और लाल रंग में अंतर करने में परेशानी होती है। इसलिए जो जंगल में श्वान रहते हैं वो या तो सुबह निकलते हैं या फिर शाम ढलने के बाद सक्रिय होते हैं।