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20 साल पुराने पट्टे वाली कृषि भूमि की अब खरीदी-बिक्री होगी आसान, नियम बनाने की तैयारी शुरू

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अपने नए प्रावधानों में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किन पट्टेधारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसमें मुख्य रूप से आजीविका के लिए दिए गए पट्टे शामिल हैं।

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jamin patta

छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्र में 20 साल पुराने पट्टे वाली कृषि भूमि की खरीदी-बिक्री का रास्ता जल्द ही आसान हो सकेगा। इसके लिए राज्य निर्माण के बाद पहली बार नियम तैयार करने की कवायद शुरू हुई। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इसके प्रारंभिक नियम तैयार कर 14 नवम्बर को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है।

इनको नहीं मिलेगा लाभ
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अपने नए प्रावधानों में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किन पट्टेधारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसमें मुख्य रूप से आजीविका के लिए दिए गए पट्टे शामिल हैं। इसमें अधिकतम सीमा अधिनियम (सीलिंग एक्ट) के तहत अतिशेष घोषित भूमि, भू-दान यज्ञ एवं दान में प्राप्त भूमि शामिल नहीं होगी। इसके अलाव वन अधिकार के अधीन आवंटित पट्टे की भूमि को भी इससे दूर रखा गया है।

ऋण पुस्तिका भी मिलेगी
प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर भूमिस्वामी के रूप में, संहिता द्वारा प्रदत्त समस्त अधिकार एवं दायित्व अधिरोपित माने जाएंगे। संहिता की धारा 114 - क के अनुसार भूमिस्वामी को ऋण पुस्तिका का अधिकार होगा।

अब 15 दिन के भीतर राज्य का कोई भी नागरिक इसे लेकर दावा-आपत्ति कर सकता है। राज्य सरकार दावा-आपित्तयों को विचार करने के बाद नियम को अंतिम रूप देगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शासकीय पट्टे में आवंटित कृषि भूमि की खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया काफी जटिल थी। इसमें कई कानूनी-दावपेंच भी आते थे। इसे दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ नगरेत्तर क्षेत्र में शासकीय भूमि पर आवंटित कृषि भूमि के भूमिस्वामी अधिकार नियम 2022 तैयार कर रहा है। यह नियम शहरी क्षेत्रों में राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड-4 क्रमांक-3 के तहत कृषि प्रायोजन के लिए दी गई पट्टे की भूमि के लिए ही लागू होगा। शासकीय पट्टों में कृषि प्रयोजनार्थ आवंटित पुनर्वास के पट्टे एवं सिहदेव योजना के पट्टे भी शामिल होंगे।

यह होगी प्रक्रिया
शासकीय पट्टेदार द्वारा भूमिस्वामी अधिकार के लिए अपना आवेदन संबंधित दस्तावेजों के साथ कलेक्टर को देगा। भूमिस्वामी के रूप में भू-अभिलेखों को अद्यतन किए जाने के पूर्व, पट्टों की वैद्यता तय करने का जिम्मा कलेक्टर का होगा। इसके बिना खरीदी-बिक्री के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी। पट्टों के सत्यापन के दौरान पात्रता, प्रक्रिया एवं अवधि का मूल्यांकन किया जाएगा। इस दौरान त्रुटिपूर्ण जारी पट्टों को नियमानुसार शून्य घोषित किया जाएगा। विभागीय औपचारिकता पूरी होने के बाद पात्र पाए जाने पर शासकीय पट्टेदार को भूमिस्वामी अधिकार प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया छह महीने के भीतर करनी होगी।