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शक्कर कारखाने में 12 करोड़ 36 लाख 38 हजार रुपए का भ्रष्टाचार, भाजपा ने की जांच की मांग

- भाजपा का आरोप, सहकारिता विभाग में नियमों और अधिनियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां.

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शक्कर कारखाने में 12 करोड़ 36 लाख 38 हजार रुपए का भ्रष्टाचार, भाजपा ने की जांच की मांग

शक्कर कारखाने में 12 करोड़ 36 लाख 38 हजार रुपए का भ्रष्टाचार, भाजपा ने की जांच की मांग

रायपुर. सूरजपुर जिले के ग्राम केरता में स्थित मां महामाया सहकारी शक्कर कारखाना में अधिकारियों की घोर लापरवाही व भ्रष्टाचार के चलते लगभग 12 करोड़ 36 लाख 38 हजार रुपए कीमत की शक्कर की कमी पाई गई। यह आरोप भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशिकांत द्विवेदी और प्रभारी देवजी भाई पटेल ने लगाया है। साथ ही इसकी विस्तार से जांच कर दोषियों के कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है। पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया, इस शक्कर कारखाने में लगातार शक्कर स्टॉक में कमी आने की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन सहकारिता मंत्रालय द्वारा जांच दल का तो गठन किया गया। जांच दल ने रिपोर्ट भी पेश की है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जांच दल द्वारा उक्त शक्कर कारखाने की जांच कर जो प्रतिवेदन सौंपा है, वह चौंकाने वाला है।

घोर लापरवरही बरती गई
भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशिकांत द्विवेदी ने बताया, शक्कर कारखाने के गोदामों में शक्कर के भौतिक सत्यापन में जांच दल द्वारा कई कमियां पाई गई। कारखाना द्वारा शक्कर की बोरियों की स्टैकिंग वैज्ञानिक तरीके से नहीं की गई। स्टेकवार जानकारी प्रदर्शित न करने के संबंध में पूछने पर कोई जानकारी प्रबंधन द्वारा नहीं दी गई।

भ्रामक जानकारी दी गई
उन्होंने बताया कि कारखाने के रजिस्टर में 28 अप्रैल 2021 को अचानक 2320 मीट्रिक टन मोलासेस (शीरा) का अतिरिक्त स्टॉक दर्शाया गया जो एक दिन में हो पाना संभव नहीं है। जबकि कारखाने के दस्तावेज के अनुसार 22 मार्च 2021 के पश्चात मोलासिस का उत्पादन रुकना दिखाया गया है। अतः कारखाने के दस्तावेजों के आधार पर ही रिकॉर्डेड मोलासिस की मात्रा में भौतिक सत्यापन में 1641 मीट्रिक टन मोलासिस अधिक पाई गई।