
नेशनल जीतकर किया सेल्समैन व हॉकर का काम, घर की परिस्थयों से जीता और मिली सफलता
इंटरनेशनल वेटलिफ्टर रुस्तम सारंग ने पिता की जिद से पहला नेशनल महज 12 साल की उम्र में जीता उसके बाद जब पिता की आखों में उन्होंने जीत की खुशी के आंसू देखे तो उनके अंदर इंटरनेशन मेडल लाने का जुनून जागा और वह इस मुकाम तक पहुंच पाए। अपनी कड़ी मेहनत के चलते उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर कई गोल्ड मेडल जीतकर देश व राÓय का मान बढ़ाया है।
रुस्तम सारंग का जन्म 12 सितंबर 1986 रायपुर के गुढिय़ारी इलाके में गरीब परिवार में हुआ था। पिता बुधराम सारंग कारपेंटर और मां राजकुमारी सारंग गृहणी थीं। तीन भाई एक बहन में रुस्तम सबसे बड़े थे। रुस्तम और छोटे भाई जयदीप के पैदा होने के बाद पिता ने अचानक वेटलिफ्टिंग शुरू की। नेशनल लेवल पर मेडल जीतने पर कलेक्टोरेट में उन्हें चपरासी की नौकरी मिल गई। पिता चाहते थे कि उनका बेटा इंटरनेशनल में गोल्ड मेडल लाए। छोटा भाई जयदीप तो उनके साथ वेटलिफ्टिंग करने लगा, लेकिन रुस्तम की रुचि क्रिकेट में थी। रुस्तम जब 12 साल के थे तो उन्होंने पिता की जेब से 10 रुपए चुराए तो खूब मार पड़ी और पिता ने सख्ती कर वेटलिफ्टिंग की तैयारी शुरू कराई। मात्र छह माह की मेहनत में ही रुस्तम ने छत्तीसगढ़ स्तरीय ओपन प्रतियोगिता में मेडल जीता।
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चाचा के गुजर जाने से उनके परिवार की जिम्मेदारी भी रुस्तम के पिता के ऊपर आ गई। रूस्तम ने सेल्स मेन, हॉकर आदि का काम करके 10वीं पास किया। 2004 में दूसरा नेशनल चैंपियनशिप जीता और इंटरनेशनल के लिए सेलेक्ट हुआ। इसी बीच इंडियन फेडरेशन पर बैन लग जाने से खेल नहीं सकें। 2005 में पहला इंटरनेशनल खेला और उजबेकिस्तान में गोल्ड मेडल लाकर एशियन जूनियर चैंपियनशिप जीता। इसेक बाद से अब तक रुस्तम ने कॉमनवेल्थ सहित नेशनल और इंटरनेशनल लेबल पर कई गोल्ड जीते है।
Published on:
31 May 2020 01:48 am
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