
Sant Kabir Das Jayanti 2020 : कबीर बादल प्रेम का, हम पर बरसा आई
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कबीरपंथियों में कबीर दास जी के जन्म के विषय में यह पद्य प्रसिद्ध है-
चौदह सौ पचपन साल गए, चन्द्रवार एक ठाठ ठए।
जेठ सुदी बरसायत को पूरनमासी तिथि प्रगट भए॥
घन गरजें दामिनि दमके बूंदे बरषें झर लाग गए।
लहर तलाब में कमल खिले तहं कबीर भानु प्रगट भए॥
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कबीर जयंती के मौके पर राज्यपाल अनुसुईया उइके (Governor Anusuiya Uikey) ने कहा कि भक्तिकाल के महान कवि के साथ-साथ संत कबीर दास समाज सुधारक भी थे। उन्होंने तत्कालीन समाज को नई दिशा प्रदान की थी और समाज में फैली हुई कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उनके संदेश वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है।
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने कहा कि सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार और सामाजिक समरसता के कबीर साहेब के संदेश को छत्तीसगढ़ (chhattisgarh) के लोगों ने आत्मसात किया है। कबीरधाम (Kabirdham) से लेकर दामाखेड़ा (Damakheda) तक उनके अनुयायियों ने आज भी उनके विचारों की अलख जगा रखी है। उन्हीं के जीवनमूल्यों को लेकर ही हम नवा छत्तीसगढ़ गढऩे की परिकल्पना के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
ये भी पढ़ें...[typography_font:14pt;" >रायपुर. संत कबीर दास ने कहा था- कबीर बादल प्रेम का, हम पर बरसा आई, अंतरि भीगी आतमा, हरी भई बनराई। कबीर दास जी की जयंती ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा (jyesth purnima) को मनाई जाती है। कबीर जयंती (Sant Kabir Das Jayanti) 5 जून (5 june) पर छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुईया उइके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं।
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Published on:
05 Jun 2020 01:50 am
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