
रायगढ़। साराडीह बैराज के निर्माण के दौरान ही सारंगढ़ के जशपुर कछार ग्राम में जमीन के खरीद-बिक्री का खेल शुरू हो गया था। इतने बड़े पैमाने पर डूबान क्षेत्र में जमीन खरीदी को लेकर उस दौरान भी सवाल उठे थे लेकिन राजस्व अधिकारियों ने इसको गंभीरता से नहीं मिला।
अब किसानों ने आरोप लगाया है कि जशपुर कछार क्षेत्र के करीब 154 किसानों के नाम पर दर्ज 203.342 हेक्टेयर जमीन को रायपुर की मदनपुर साउथ कोल कंपनी के डायरेक्टर आलोक चौधरी के नाम पर फर्जी तरीके से क्रय किया गया है। किसानो ंने इसको लेकर कोर्ट की शरण लेने के साथ प्रशासन को भी पूरे मामले से अवगत कराया है। लिखीत तौर पर प्रशासन को दिए गए ज्ञापन के माध्यम से यह अवगत कराया गया है कि कंपनी के अधिकारियो ंने ग्रामीणों को बैराज के डूबान क्षेत्र में आने वाले जमीन में जमा होने वाले रेत के उठाव के नाम पर एग्रीमेंट करना दिखाते हुए अपने नाम पर रजिस्ट्री करा लिया गया। जिसके कारण किसानों को न तो भू-अर्जन की भनक लगी न ही मुआवजा राशि की कोई जानकारी मिली।
बाद में जानकारी मिलने पर पता चला कि जमीन तो कंपनी के नाम पर है और मुआवजा राशि भी जारी हो चुका है। जिसको लेकर ग्रामीणों ने सारंगढ़ न्यायालय में प्रकरण दायर किया है। साथ ही प्रशासन को इस मामले से अवगत कराते हुए रजिस्ट्री को शुन्य घोषित कर निरस्त करने की मांग की है।
अपने ही आदेश की अनदेखी कर दिया मुआवजा
तत्कालीन एसडीएम नंदकुमार चौबे ने इस मामले में 26 अप्रैल को प्रकरण का निराकरण सक्षम न्यायलय द्वारा किए जाने के बाद ही मुआवजा का भुगतान किए जाने का आदेश जारी किया, लेकिन नवपदस्थ एसडीएम ने इस मामले में उक्त आदेश को अनदेखा करते हुए कंपनी को 44 करोड़, 86 लाख , 25873 रुपए के मुआवजा का चेक जारी कर दिया।
बैंक प्रबंधन को भी ग्रामीणों ने दिया आवेदन
इस मामले को लेकर ग्रामीणो ने प्रशासन से उक्त कंपनी को जारी मुआवजा राशि का आहरण न हो इसको लेकर खाता होल्ड करने की मांग की है साथ ही बैंक प्रबंधन को भी आवेदन के माध्यम से प्रकरण को अवगत कराते हुए राशि के आहरण पर रोक लगाने की मांग की है।
इसके बाद भी रजिस्ट्री
गौर करने वाली बात यह है कि साराडीह बैराज को लेकर धारा का प्रकाशन होने के बाद भी जमीन की खरीदी की गई है। ग्रामीणों के बताए अनुसार रात में पंजीयन विभाग का कार्यालय गांव में शिविर लगाकर काम किया है। इससे यह साफ होता है कि कंपनी के अधिकारियों के साथ राजस्व व पंजीयन विभाग का भी सांठ-गांठ रहा है।
सारंगढ़ के एसडीएम राजीव पांडेय ने कहा रजिस्ट्री को निरस्त करने का अधिकार सिविल न्यायालय को है राजस्व को नहीं। सिविल न्यायालय द्वारा कोई निर्णय व आदेश जारी करने पर उसका पालन करने संबंधी शपथ पत्र संबंधित फर्म ने दिया है जिसके आधार पर मुआवजा का चेक दिया गया है।
Published on:
18 Jul 2022 05:57 pm
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