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शिक्षा प्रणाली में हो सुधार

देशभर के 2000 प्रतिभागियों में टॉप-10 में प्रदेश के सात शिक्षकों को जगह मिलना प्रदेशवासियों के लिए न केवल खुशखबर है, बल्कि गौरव की भी बात है।

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शिक्षा प्रणाली में हो सुधार

शाबाश! प्रदेश के शिक्षकों द्वारा 'द टीचर ऐपÓ के माध्यम से बच्चों को सिखाने-पढ़ाने की सरल शैली विकसित करना प्रशंसनीय और अनुकरणीय है। केंद्र सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संसाधन प्रतियोगिता में प्रदेश के अंबिकापुर की दो शिक्षिकाओं प्रमिला कुशवाहा को प्रथम व सुनीता भगत को द्वितीय पुरस्कार तथा देशभर के 2000 प्रतिभागियों में टॉप-10 में प्रदेश के सात शिक्षकों को जगह मिलना प्रदेशवासियों के लिए न केवल खुशखबर है, बल्कि गौरव की भी बात है। 'द टीचर ऐपÓ में गणित, भाषा, विज्ञान की पाठ्यवस्तु हैं, जिसे देखकर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल के बच्चे खेल-खेल में सीख सकेंगे। सर्वविदित है कि शिक्षा में गिरावट आज संपूर्ण देश के लिए गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण समस्या बनी हुई है। शिक्षा की गुणवत्ता घटने के प्रमुख कारणों में हैं पढ़ाई की वर्षों पुरानी पद्धति, गलत शिक्षा नीति, शिक्षकों की कर्तव्यहीनता, बुनियादी सुविधाओं व संसाधनों की कमी तथा सरकारी शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा। दरअसल गुणवत्ताहीन शिक्षा न देशहित में है और न शिक्षण संस्थानों के और न ही विद्यार्थियों के। सरकारी शिक्षण संस्थानों की अनदेखी तो अदूरदर्शिता है।
अफसोस की बात है कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का हाल बेहाल है। शिक्षा की गुणवत्ता में इस कदर गिरावट आई है कि इससे प्राथमिक और उच्च शिक्षा दोनों ही अछूती नहीं है। फिर चाहे शिक्षा का व्यवसाय बनना हो, शिक्षा के मंदिर का दुकान बनना हो, निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी हो या फिर सरकारी स्कूल-कॉलेजों की बदहाली। जहां देखो वहां छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ होते दिखाई पड़ता है। शिक्षकों के विलंब से स्कूल पहुंचने, समय से पहले चले जाने, नशाखोरी करने, अध्यापन कार्य पर ध्यान नहीं देने तथा लापरवाही बरतने की शिकायतें आम हो गई है। इतना ही नहीं, शिक्षण संस्थानों में खुलेआम नकल और नकली उत्तरपुस्तिका बाजार में मिलने की खबरें भी सुर्खियां बनती रहती हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संसाधन प्रतियोगिता में प्रदेश के शिक्षकों द्वारा परचम फहराना शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणास्रोत और शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए उम्मीद की नई किरण है। लिहाजा, सरकार को बच्चों को सिखाने-पढ़ाने की सरल शैली का प्रयोग अनिवार्य करना चाहिए। बेहतर शिक्षा के लिए तकनीक का लाभ विद्यार्थियों को हर हाल में मिलना चाहिए। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार अत्यंत जरूरी है।