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श्रीरामकथा : ‘सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने वालों के साथ राम की हमेशा कृपा होती है-पं.विजय

श्रीरामकथा : जब तक दृष्टि और दृष्टिकोण स्पष्ट नहीं होगा, तब तक लक्ष्य मुश्किल है। हनुमान का लक्ष्य दृष्टि और दृष्टिकोण बहुत ही स्पष्ट था। उन्होंने संकल्प के साथ लक्ष्य को हासिल किया।

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श्रीरामकथा : बिलासपुर. माता सीता का पता लगाया। यह सच है कि लक्ष्य हासिल करने के दौरान हनुमान को विभिन्न प्रकार के बाधाओं का सामना करना पड़ा। वह लक्ष्य क्या जिसमें बाधाएं ना हों क्योंकि बाधाएं ही मनुष्य को संकल्पवान होने को प्रेरित करती हैं। सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ने वालों के साथ राम की हमेशा कृपा होती है। हनुमान के साथ भी थी। यह बातें संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने रामकथा आयोजन के सातवें दिन हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ से कही। महाराज ने बताया कि इस दुनिया ने जिसको ठुकराया और उसने यदि सच्चे मन से याद किया, उसे भगवान का आशीर्वाद जरूर मिला है क्योंकि राम कृपानिधान हैं। उन्हें कोई भले भुला दे लेकिन राम अपने बच्चों को कभी अकेला नहीं छोड़ते हैं। महाराज ने बताया हनुमान भक्तों के लिए भगवान तक पहुंचने का हमेशा रास्ता बनाने का किया है। जिसने हनुमान को आराध्य माना,उसे एक ना एक दिन राम का दर्शन जरूर मिलेगा। विजय कौशल महाराज ने सातवें दिन किष्किन्धा और सुन्दरकाण्ड मनोरम झांकी को पेश किया। राम सुग्रीव मिलाप समेत सुरसा, लंकनि, त्रिजटा और विभिषण के चरित्र का जीवन्त चित्रण किया।

सिंह ने लिया आशीर्वाद
लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में चल रहे श्री राम कथा में मानस मर्मज्ञ विजय कौशल महाराज का भाजयुमो नेता रौशन सिंह ने आशीर्वाद लिया।

मित्रता का रिश्ता सबसे ऊपर
संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने किष्किन्धा और सुन्दरकाण्ड का जीवन्त चित्रण किया। खचा खच भरे पण्डाल में मौजूद हजारों श्रध्दालुओं को राम सुग्रीव, सीता खोज समेत बालिबध का प्रसंग सुनाया। विजय कौशल ने बताया कि इस दुनिया में मित्र को सब रिश्तों से ऊपर स्थान हासिल है।

बच्चों में चरित्र निर्माण का मतलब राष्ट्र निर्माण
विजय कौशल महाराज ने बताया कि कहने की जरूरत नहीं कि भगवान राम समर्थवान थे। बावजूद इसके उन्होंने मानवीय रिश्तों का पालन कर मर्यादा का ना केवल पाठ पढ़ाया। बल्कि रिश्तों के बीच पुरुषों के लिए उत्तम चरित्र भी गढ़ा। लक्ष्मण और हनुमान ने सेवा कर भक्तों के लिए मिसाल कायम किया।

रामकथा में ये रहे विशेष रूप से उपस्थित
रामकथा के दौरान आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक अमरअग्रवाल, शशिअग्रवाल, आदित्य अग्रवाल, गुलशन ऋषि, महेश अग्रवाल, रामअवतार अग्रवाल, गिरीश शुक्ला, सुनील संथालिया, रामदेव कुमावत, गोपाल शर्मा, मोहन पांडे, कोमल शर्मा, नवीन अंजली दुबे, रीता बरसैया, विश्वनाथ केडिया आदि श्रद्धालुओं की विशेष उपस्थिति रही।