
कुछ लोग मुझे परदेसिया कहते हैं, मैंने तो पूरी जिंदगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा देने में लगा दी
ताबीर हुसैन @ रायपुर. मेरा जन्म महाराष्ट्र के एक गांव में हुआ था, जब मैं छोटा था तभी हमारा परिवार छत्तीसगढ़ आ गया। मैं11 साल की उम्र से फिल्मों के प्रति अट्रेक्ट हुआ। आज 73 साल का हूं तब भी काम कर रहा हूं। मैंने तो पूरी जिंदगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा देने में लगा दी, हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि मैं परदेसिया हूं। अब मैं उनको क्या जवाब दूं। आप अपने काम से ही किसी का मुंह बंद कर सकते हैं। चार दशक हो गए। इतने छत्तीसगढ़ी एल्बम बनाए जिसकी कोई गिनती नहीं। यह कहना है फिल्मकार मोहन सुंदरानी का। पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने फिल्मी कॅरियर को लेकर चर्चा की।
अगर मैं बन जाता तो बना नहीं पाता
एक सवाल पर कहा कि अगर मैं हीरो बन जाता तो दूसरों को कैसे बना पाता। आज आप देख लीजिए इंडस्ट्री में जितने भी सुपर स्टार हैं वे कितनों को बढ़ाए हैं। ईश्वर ने यह सौभाग्य मुझे दिया कि मैं दूसरों को आगे बढ़ाऊं। छत्तीसगढ़ी इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हैं जो बचपन से मुझसे जुड़े हैं और आज वे दौलत और शोहरत दोनों कमा रहे हैं।
शादी वाले कैमरे से शुरू की फिल्म मेकिंग
हमारा बचपन बहुत गरीबी में बीता। घर में तेल खरीदने के लिए दो रुपए नहीं होते थे लेकिन मैं फिल्म बनाने का सपना देखने लगा था। समय बीतता गया लेकिन मेरा मनोबल ऊंचा रहा। एक समय ऐसा भी आया कि मैंने शादी वाला कैमरा लिया। शादी में तो वह काम आया ही, उसी से वीडियो एल्बम की शुरुआत कर दी। वैसे मेरी पहली वीडियो फिल्म है- जय मां बंबलेश्वरी।
टेक्निक बॉलीवुड की हो लेकिन कल्चर छत्तीसगढ़ी
नए फिल्मकारों के लिए सुंदरानी ने कहा कि टेक्निक भले बॉलीवुड की हो लेकिन कल्चर छत्तीसगढ़ी ही हो। आज मैं देखता हूं कि नए लोग काम तो अच्छा कर रहे हैं लेकिन वे कहीं न कहीं छत्तीसगढ़ी कल्चर को इग्नोर कर रहे हैं। दूसरी बात यह कि, अगर आपने किसी चीज को करने की ठान ली है तो वह पूरा होकर रहेगा। मैं ईश्वर पर बहुत विश्वास रखता हूं। मैंने अपनी जिंदगी में बहुत चमत्कार देखे हैं। इसलिए अपना काम ईमानदारी से करते चलें ईश्वर सब पूरा करता है।
Published on:
25 May 2022 11:48 pm
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