
स्टील, सीमेंट, स्पंज आयरन, मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल, छोटे-बड़े उद्योगों में 7 हजार करोड़ का व्यापार प्रभावित
रायपुर. स्टील हब कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के उद्योगों में आग उगलने वाली भठ्ठियां ठंडी पड़ी हुई है। उद्योगपतियों को चिंता इस बात की है कि बिना सरकारी मदद से 14 अप्रैल के बाद उद्योग कैसे शुरू करें। लॉकडाउन के बाद प्रभावित व्यापार का आंकलन करें तो स्टील, सीमेंट, स्पंज आयरन, मिनी स्टील प्लांट, रोलिंग मिल, छोटे-बड़े उद्योगों में लगभग 6000 से 7000 करोड़ का व्यापार प्रभावित हुआ है।
इन उद्योगों में लगभग 50 हजार टन माल बनकर तैयार है, जिसका कोई खरीदार नहीं है। उद्योगपतियों के सामने वर्तमान में दो बड़ी चुनौती हैं। पहला जो माल तैयार है उसकी बिक्री, दूसरा लॉकडाउन खुलने के बाद उत्पादन कैसे जारी रखें। इन चुनौतियों के सामने मैनपॉवर सबसे अहम मुद्दा बनकर सामने आ रहा है, क्योंकि अभी भी प्रदेश की फैक्ट्रियों में मजदूरों और नॉन टेक्निकल स्टॉफ के जरिए 70 से 80 फीसदी काम होता है।
बड़े स्टील प्लांट में भले ही आधुनिक तरीके से काम हो रहा हो, लेकिन बिना मजदूरों के यहां भी बड़ा उत्पादन संभव नहीं है। कुल मिलाकर स्टील हब में अभी भी संशय की स्थिति है कि 14 अप्रैल के बाद उद्योगों में उत्पादन की क्या रणनीति होगी। छोटे से लेकर बड़े स्टील प्लांट में रोज यही मंथन चल रहा है।
1800 राइस मिलों में कुछ ही चालू
चावल उत्पादन के लिए मशहूर प्रदेश में लगभग 1800 राइस मिले हैं। यहां से चावल का बड़ा निर्यात अफ्रीकी देशों में किया जाता है। आवश्यक सेवाओं के मद्देनजर राज्य सरकार ने कुछ मिलों को शुरू करने की अनुमति दी है, लेकिन यहां भी मजदूरों का बड़ा संकट बताया जा रहा है।
एक्सपोर्ट पर पाबंदी
स्टील सेक्टर के उद्योगपतियों का कहना है कि चाइना में डिमांड खुल चुकी है। प्रदेश से बड़ी मात्रा में पैलेट और फेरो एलाइज का निर्यात चाइना में होता है। इसकी हिस्सेदारी लगभग 35 से 40 फीसदी है। इसके अलावा साउथ अफ्रीका, बांग्लादेश, श्रीलंका आदि देशों में स्टील बनाने के लिए जरूरी उत्पादों का निर्यात छत्तीसगढ़ के उद्योगों से होता है। स्थानीय मांग कमजोर रहने की आशंका के बाद उद्योगपतियों को विदेशी निर्यात से भी उम्मीदें हैं, लेकिन आयात-निर्यात पर प्रतिबंध की वजह से फिलहाल यहां भी निराशा हाथ लग रही है।
सीमेंट उद्योगों का बुरा हाल
रायपुर और पड़ोसी जिलों में लगभग 6 बड़ी सीमेंट कंपनियां हंै, जो कि स्थानीय खनिज संसाधनों के जरिए उत्पादन करते हुए देशभर में सीमेंट की सप्लाई करती है। इन कंपनियों में मासिक 20 से 22 लाख टन का उत्पादन होता है, वहीं इनके गोदामों, डिपो और बड़े डीलरों के पास लगभग ५ से ७ लाख टन का उत्पादन बनकर तैयार रखा है। कंपनियों को भी यह चिंता सता रही है कि मांग बरकरार नहीं रहने पर तैयार माल की लागत किस प्रकार निकालेंगे।
सीआईआई की मांगें
मिनिमम डिमांड चार्ज में मार्च-अप्रैल-मई महीने की राहत, किश्तों में भुगतान की सुविधा।
टैरिफ में 80 पैसे की राहत 31 मार्च 2021 तक बढ़ाई जाए।
प्रॉपर्टी टैक्स में 20 फीसदी की राहत।
सीएसआईडीसी मेंटेनेंस चार्ज में 20 फीसदी की राहत।
फिक्स वाटर चार्ज में राहत।
एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए मंडी शुल्क में राहत।
उद्योगों में मासिक उत्पादन
रोलिंग मिल 2 से 3 लाख टन
स्टील प्लांट 2.50 से 3 लाख टन
स्पंज आयरन 3 से 3.50 लाख टन
सीमेंट प्लांट 20-22 लाख टन
सीआईआई (छत्तीसगढ़ स्टेट काउंसिल) चेयरमैन अमित अग्रवाल ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या बिजली दरों को लेकर हैं। मिनिमम डिमांड चार्ज में राहत, किश्तों में भुगतान के साथ ही एक साल के लिए 80 पैसे टैरिफ में छूट को आगे बढ़ाना, वहीं मजदूरों को फिर से उद्योगों तक लाने के लिए सरकार की मदद से उन्हें प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
Published on:
06 Apr 2020 06:23 pm
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