
राशन दुकानों में शक्कर की कमी (Photo AI )
CG News: @हिमांशु शर्मा। शक्कर वितरण को लेकर प्रदेश में समस्या खत्म होने के नाम नहीं ले रही है। एक तो पहले से ही शक्कर की आपूर्ति नहीं होने के कारण हितग्राहियों को शक्कर नहीं मिल पा रहा। वहीं अब कई हितग्राहियों के आईडी में ही शक्कर वितरण करने शो नहीं हो रहा है। इसके कारण हितग्राही काफी परेशान है। बार-बार उचित मूल्य के राशन दुकानों की ओर से इसको लेकर शिकायत की जा रही है। इस मामले में खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर में कुछ फॉल्ट होने के कारण शक्कर शो नहीं हो पा रहा होगा। जल्द ही इसमें सुधार कर हितग्राहियों को शक्कर दिया जाएगा।
वहीं राशन दुकानों में शक्कर की आपूर्ति नहीें होने का कारण मुख्य कारण उत्पादन में कमी होना है। जानकारी के अनुसार 2025-26 में शक्कर कारखानों में 12 लाख 64 हजार मीट्रिक टन शक्कर का उत्पादन का टारगेट रखा गया था। लेकिन इस टारगेट की तुलना में लगभग 60 हजार मीट्रिक टन शक्कर का उत्पादन किया जा सका है। इसके कारण वितरण प्रणाली प्रभावित हुई है।
केस- 1
कार्डधारक- 223876064083 शक्कर के लिए राशन दुकान पहुंचा। जैसे ही इसकी आईडी ऐप में डाली गई तो, वहां सिर्फ नमक ही शो कर रहा था, शक्कर की कोई जानकारी नहीं थीं। जबकि इस कार्डधारक द्वारा हर बार दुकान से शक्कर लिया जाता है।
केस-2
इसी तरह वार्ड विपिन बिहारी में कार्डधारक- 223875385733, लक्ष्मी दुकानदार के पास शक्कर लेने पहुंची। जैसे ही दुकानदार ने आईडी में शक्कर चेक किया तो, शक्कर शो नहीं हो रहा था। जिसके कारण कार्डधारक को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।
प्रदेश में पंजीकृत कार्ड धारकों के कोटे के अनुसार 40 प्रतिशत से भी कम शक्कर का भंडारण राशन दुकानों में हो पाया है। इस वजह से अब तक 60 प्रतिशत से अधिक हितग्राहियों को शक्कर वितरण नहीं हुआ है। इधर नागरिक आपूर्ति निगम रायपुर के अधिकारी का कहना है कि कारखानों से शक्कर का भंडारण जैसे-जैसे हमारे यहां होता है, वैसे-वैसे राशन दुकानों में मांग के अनुसार भंडारण कराया जाता है।
मार्च में जितना आवंटन हुआ है, उसके अनुसार दुकानों में शक्कर का भंडारण करा चुके हैं। हालांकि इस बार कारखानों से शक्कर की बहुत कम मात्रा में आपूर्ति हुई है।
प्रदेश में संचालित सहकारी शक्कर के कारखानें घाटे में चल रहे हैं। हर साल कारखाना में शक्कर का उत्पादन तो किया जा रहा है। लेकिन इससे मुनाफा नहीं बल्कि करोड़ों रुपए का घाटा हो रहा है। विभाग से मिले आंकड़ा के अनुसार पिछले तीन वर्ष में इन कारखानों के संचालन में शासन को 267 करोड़ 40 लाख रुपए का घाटा हुआ है। औसत निकालें, तो हर वर्ष 89 करोड़ रुपए की हानि हो रही है।
Updated on:
11 Apr 2026 12:55 pm
Published on:
11 Apr 2026 12:54 pm
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