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Substandard Medicines: सरकारी अस्पतालों की दवाओं पर छिड़ा विवाद, जांच की मांग लेकर राज्यपाल पहुंची कांग्रेस

Govt Hospital Medicine Controversy: छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने सरकारी अस्पतालों में अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाओं की सप्लाई का आरोप लगाते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा।

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Substandard Medicines

सरकारी अस्पतालों में अमानक (photo source- Patrika)

Substandard Medicines Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने बड़ा सवाल खड़ा किया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) के माध्यम से सप्लाई की जा रही कथित अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाओं की जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि यह मामला सीधे तौर पर लाखों गरीब मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा हुआ है।

Chhattisgarh Health Department: दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवाल

ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले कई महीनों से सरकारी अस्पतालों में वितरित की जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर मीडिया और समाज में लगातार चर्चा हो रही है। गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलने वाली दवाओं के निम्न स्तर को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। कांग्रेस ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

CGMSC पर लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन समय-समय पर अपनी ही सप्लाई की गई दवाओं को ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट के आधार पर अमानक घोषित कर वापस मंगाने के आदेश जारी करता रहा है। पार्टी का दावा है कि जब तक ऐसी दवाओं को वापस लिया जाता है, तब तक हजारों मरीज उनका सेवन कर चुके होते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिसकी गहन जांच होनी चाहिए।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने भी जताई आशंका

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और फार्मेसी स्टाफ ने भी कई मौकों पर दवाओं और इंजेक्शनों के प्रतिकूल प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। कांग्रेस का आरोप है कि मरीजों में विपरीत लक्षण दिखाई देने के बावजूद शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे दवाओं की गुणवत्ता को लेकर संदेह और गहरा हुआ है।

दवाओं के स्टोरेज सिस्टम पर भी सवाल

कांग्रेस ने केवल दवा खरीद ही नहीं बल्कि उनके भंडारण को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। ज्ञापन में कहा गया है कि कई अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं को निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित नहीं रखा जाता। दवाओं के लिए आवश्यक तापमान और स्टोरेज व्यवस्था का पालन नहीं होने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मरीजों को मिलने वाली दवाओं की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।

दो वर्षों की दवा खरीदी की जांच की मांग

कांग्रेस ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि पिछले दो वर्षों में CGMSC द्वारा की गई दवा खरीदी और सप्लाई की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। पार्टी ने इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक समिति या विशेष जांच दल गठित करने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि दवा खरीद और सप्लाई में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

Medical college medicine dispute: गरीब मरीजों की सेहत से जुड़ा है मामला

कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। ऐसे में यदि उन्हें गुणवत्ताहीन दवाएं मिलती हैं तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब परिवारों को उठाना पड़ता है। पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

जांच के आदेश पर टिकी निगाहें

कांग्रेस द्वारा राज्यपाल को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि जांच के आदेश जारी होते हैं तो प्रदेश की दवा खरीद और वितरण व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस ने राज्यपाल से हस्तक्षेप कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मरीजों के हित में आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।