
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में बड़ी लापरवाही, बारहवीं के परीक्षार्थियों को थमा दिया दसवीं का प्रश्नपत्र
मैनपुर। जिला मुख्यालय स्थित नामी प्राइवेट स्कूल द्वारा सीबीएसई बोर्ड के बारहवीं के परीक्षा में बड़ी लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। जिसके चलते दसवीं सीबीएसई बोर्ड का पेपर 3 दिन पहले ही ओपन हो गया। इस मामले को दबाने में स्कूल प्रबंधन सहित शिक्षा विभाग लगा हुआ है।
विद्यार्थियों और उनके पालकों से मिली जानकारी के अनुसार श्रद्धा पब्लिक स्कूल के 12वीं के 16 बच्चे 24 फरवरी को परीक्षा केंद्र मजरकट्टा स्थित द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल में परीक्षा दिला रहे थे। इन परीक्षाथियों को द्रोणाचार्य स्कूल के प्रिंसिपल सहित प्रबंधन समिति ने 12वीं के इंग्लिश पेपर के बदले 27 फरवरी को होने वाले 10वीं कक्षा के इंग्लिश का पेपर दे दिया। पेपर देखने के लिए मिलने वाले शुरू के 15 से 20 मिनट के बाद बच्चों ने द्रोणाचार्य स्कूल के प्रबंधन को बताया कि उनको दिया गया पेपर 10वीं कक्षा का है। इसकी जानकारी लगते ही स्कूल प्रबंधन ने आनन-फानन में बच्चों से पेपर वापस ले लिया। बच्चों ने बताया कि इस दौरान स्कूल प्रबंधन ने उनको कहा कि उनका पेपर राजिम से अभी निकला है। उसको आने में वक्त लगेगा, तब तक आप लोग इंतजार करिए। इसके बाद द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल अपने स्टाफ सहित जिला मुख्यालय में जिस संस्थान में पेपर रखा हुआ था वहां गए और वहां से दोबारा 12वीं कक्षा का इंग्लिश का पेपर लेकर स्कूल पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम में लगभग 1 से 1.15 घंटे का समय बीत चुका था। इसके बाद स्कूल स्टाफ पेपर सहित वापस स्कूल पहुंचा और बच्चों से प्रश्न पत्र निश्चित समय अवधि में हल करने को कहा। बच्चों और पालक ने इस मामले को लेकर शिकायत की है कि उन्हें केवल 2 घंटे का समय पेपर दिलाने के लिए मिला। जिस सवालों के जवाब उन्हें आते थे, उसके जवाब भी दे नहीं दे पाए। जिसके चलते उनका पेपर बिगड़ गया है।
पहले से खुला था लिफाफा
इस मामले को लेकर परीक्षार्थियों ने एक बात और बताई कि जब पहली बार उन्हें कक्षा में पेपर मिला तो सीलबंद लिफाफा कक्षा में आया था और स्कूल स्टाफ ने 2 छात्रों को बुलाकर लिफाफे को खोला था, परंतु दूसरी बार जब बारहवीं कक्षा का प्रश्न पत्र आया तब वह पहले से ही खुला हुआ था।
8 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
स्कूल प्रबंधन इस मामले को जहां दबाने में लगा हुआ है, वहीं शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने घटना की पूरी जानकारी होने से इनकार किया। सीबीएसई बोर्ड जैसे एग्जाम का पेपर लीक होना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है। वहीं, घटना को 8 दिन बीत जाने के बाद भी किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि दसवीं बोर्ड का पेपर 3 दिन पहले ही खुल चुका था। दसवीं कक्षा के छात्रों और उनके पालकों ने बताया कि उनके बच्चों को जब प्रश्न पत्र मिला तो उसमें पहले से ही रोल नंबर व 12वीं कक्षा के छात्रों के नाम लिखे हुए थे।
गोपनीयता को लेकर उठ रहे सवाल
सीबीएसई बोर्ड के एग्जाम पेपर की गोपनीयता को लेकर भी भारी लापरवाही सामने आई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय में जिस संस्थान में पेपर रहता है उस संस्था के द्वारा भी स्कूल प्रबंधन को पेपर देते समय लापरवाही की गई, जबकि सीबीएसई बोर्ड के पेपर 4 से 5 लिफाफे के अंदर सील बंद अवस्था में रहते हैं और ऊपर पेपर से संबंधित सभी जानकारी दी जाती है। इस मामले में संबंधित संस्थान प्रमुख को पेपर देते समय और कक्षा रूम में पहुंचते समय दोनों समय फोटो खींच कर रखना होता है। परंतु, संस्थान में भी भारी लापरवाही दिखाते हुए स्कूल प्रबंधन को बिना चेक किए ही 10वीं कक्षा के पेपर का बंडल दे दिया। इस पूरे मामले में दूसरी लापरवाही तब उजागर हुई जब स्कूल प्रबंधन आनन-फानन में 12वीं कक्षा का पेपर लेने वापस संस्थान पहुंचा। सूत्रों की मानें तो इस पेपर लेने की प्रक्रिया में कम से कम 20 से 30 मिनट का समय लगता है, परंतु स्कूल प्रबंधन को आनन-फानन में पेपर दिए जाने की खबर भी मिली है। पूरी घटना को लेकर श्रद्धा पब्लिक स्कूल में पढऩे वाले छात्रों के पालकों ने सीबीएसई बोर्ड के डायरेक्टर को लिखित में शिकायत भेजी है और मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
्स्कूल प्रबंधन ने बिना पर्यवेक्षक के करवा दी परीक्षा
सीबीएसई बोर्ड के एग्जाम के नियमानुसार पर्यवेक्षक की मौजूदगी में ही सारे विषयों का एग्जाम होना है, परंतु विभाग की लापरवाही के साथ-साथ ही स्कूल प्रबंधन ने भी लापरवाही दिखाते हुए बिना पर्यवेक्षक के ही परीक्षा करवा दी, जो इस पूरे मामले में सबसे बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
वर्जन
पेपर लीक होने संबंधी लिखित शिकायत में कोई जानकारी और पुष्ट खबर अभी तक हमें मिली नहीं है। लिखित में अगर कोई भी शिकायत आती है तो हम उसमें अवश्य जांच करेंगे । गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी होने के नाते इस मामले को लेकर हम पूरी जांच करेंगे और उसके बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उस पर कार्यवाही करेंगे।
- डी. एस. चौहान, जिला शिक्षा अधिकारी
वर्जन
मैं अभी फ्लाइट में बैठा हूं। प्लेन टेक ऑफ होने वाला है मुझे फोन को फ्लाइट मोड में डालना है। मैं ज्यादा बात नहीं कर पाऊंगा, पर आपसे इतना कहना चाहता हूं इस पूरे मामले को लेकर जो सच है उसे ही प्रकाशित करें और बच्चों को भी सच बोलना चाहिए ।
- राहुल घोष, प्रिंसिपल, द्रोणाचार्य पब्लिक स्कूल
वर्जन
श्रद्धा पब्लिक स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को 12वीं के बदले दसवीं का पेपर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में 1 घंटे विलंब से बच्चों को पेपर मिला और उन्हें पेपर दिलाने का पूरा समय नहीं मिला, जिससे उनका पेपर बिगड़ा है। इस मामले को लेकर बच्चों के पालकों ने सीबीएसई बोर्ड के डायरेक्टर के नाम लिखित शिकायत सौंपी है।
- नीलांबर सोनी, प्रिंसिपल श्रद्धा पब्लिक स्कूल
Published on:
03 Mar 2023 03:59 pm
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