25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मैनपुर क्षेत्र के जंगलों में तेंदूफल का वजूद खतरे में

छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण फल तेंदू का वजूद खतरे में है। यह फल जंगलों से गायब होने लगा है। क्योंकि इसके पेड़ कम हो रहे हैं। अवैध कटाई और वन विभाग की लापरवाही चिंताजनक है।

less than 1 minute read
Google source verification
मैनपुर क्षेत्र के जंगलों में तेंदूफल का वजूद खतरे में

मैनपुर क्षेत्र के जंगलों में तेंदूफल का वजूद खतरे में

मैनपुर। छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण फल तेंदू का वजूद खतरे में है। यह फल जंगलों से गायब होने लगा है। क्योंकि इसके पेड़ कम हो रहे हैं। अवैध कटाई और वन विभाग की लापरवाही चिंताजनक है।
ज्ञात हो कि वनों में पाया जाने वाला इस स्वादिष्ट फल को काफी गुणकारी माना जाता है। करीब 20 से 50 फीट तक ऊंचे व घना छायादार पेड़ होता है। गर्मी के दिनों में इस फल की बहार छा जाती है। तेंदूफल पकने के समय इस वृक्ष के नीचे भालू डेरा जमाए रहता है। जैसे ही पका हुआ फल झाड़ से टपकता है भालू झपट पड़ता है। ग्रामीण ऐसा बताते है कि भालू के पाचनतंत्र से होकर गुजरने के बाद ही तेंदूफल के बीज का अंकुरण संभव होता है। तेंदू बीजों से तेल और फलों के सत्व में औषधीय गुणों का प्रचुरता कब्ज दूर करता है। इसके आलावा खून साफ करने के साथ उच्च रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है। साथ ही वात रोगों की अक्सीर दवा के अलावा भीषण गर्मी में इसके सेवन से लू से न केवल बचाता है, बल्कि शरीर में प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित करता है।
तेंदूपत्ता को हरा सोना के नाम से जाना जाता है। शासन के माध्यम से तेंदूपत्ता की खरीदी की जाती है और इस पत्ते से बीड़ी बनाई जाती है। इससे लगभग करोड़ो रूपये के व्यापार होता है। साथ ही लाभांश की 80 प्रतिशत राशि सीधे संग्रहक मजदूरो को दी जाती है, क्षेत्र के वरिष्ठ ग्रामीण दलसुराम, अनस राम, सुकचंद बताते है पर्यावरण के लीहाज से तेंदू पेड़ काफी उपयोगी है। इसके नीचे खूब उगने वाली घास चारा देने के अलावा भू संरक्षण का काम भी करती है। ग्रामीणों ने तेंदू के पेड़ों को संरक्षित व सुरक्षित करने की मांग शासन-प्रशासन से की है।