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एंटी-रेबीज अभियान बना दिखावा! सड़कों पर बढ़ता खतरा, आवारा कुत्तों और मवेशियों पर काबू नहीं पा सका निगम…

CG News: रायपुर में आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस पर नगर निगम काबू नहीं कर पाया है। शहर की गलियों और सड़कों से न तो कुत्ते हट पाए हैं और न ही मवेशी।

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आवारा कुत्तों (photo-patrika)

आवारा कुत्तों (photo-patrika)

CG News: छत्तीसगढ़ के रायपुर में आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस पर नगर निगम काबू नहीं कर पाया है। शहर की गलियों और सड़कों से न तो कुत्ते हट पाए हैं और न ही मवेशी। सुबह-शाम मोहल्लों में कुत्ते झुंड में हमला करते हैं।

वहीं चौक-चौराहों और बीच सड़कों पर बैठे मवेशी ट्रैफिक के लिए परेशानी और दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राज्यों के हाईवे, स्कूल, हॉस्पिटल, बस स्टैंड , रेलवे स्टेशन आदि स्थानों को कुत्तों से मुक्त कराने का आदेश जारी किया है। जो निगम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

CG News: नतीजा रायपुर में सड़कों पर भय का साया

निगम प्रशासन ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए जरवाय में नया डॉग शेल्टर हाउस तैयार किया है, जिसमें बीमार, खूंखार और घायल कुत्तों को रखने का प्लान बनाया गया है, लेकिन शहर का यह शेल्टर हाउस पशु चिकित्सकों के अभाव में चालू नहीं हो पा रहा है। निगम के अधिकारी आवारा कुत्तों की नसबंदी कराने का दावा तो करते हैं, लेकिन शहर के हर क्षेत्र में डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

जोन स्तर पर फीडिंग जोन भी नहीं बन पाया है। ऐसे में यह समस्या ज्यादा है। संजयनगर टिकरापारा, अवंतिविहार, शंकर नगर, देवेंद्र नगर, गुढ़ियारी, तेलीबांधा और कालीबाड़ी रोड जैसे इलाकों में आवारा पशुओं की संख्या सबसे अधिक दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि निगम का एंटी-रेबीज और धरपकड़ अभियान केवल औपचारिकता तक सीमित है।

एफआईआर तक पशुपालकों पर कराई

निगम के अधिकारियों का कहना है कि पशुपालक दूध निकालकर गायों को सड़क पर छोड़ देते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए दो से तीन जगह एफआईआर भी दर्ज कराई गई। आउटर में कांजी हाउस और गोठानों में ऐसे मवेशियों को रखने की व्यवस्था की गई है। हर जोन में एक-एक काऊ केचर उपलब्ध कराया है, लेकिन समस्या से लोगों को राहत नहीं मिल रही ।

10 हजार से ज्यादा कुत्ते

70 वार्डों में 10 हजार से अधिक आवारा कुत्तों से डर का माहौल है। कुत्तों की झुंड कब झपट्टा मार कर घायल कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता है। डॉग बाइट से सबसे अधिक बच्चे शिकार हुए हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि जोन स्तर पर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कोर्ट के आदेश के परिपालन में 13 सौ से अधिक मवेशियों को गोठानों में पहुंचाया जा चुका है। यह अभियान जारी है।

एनजीओ को सौंपेंगे डॉग शेल्टर हाउस

नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग के अपर आयुक्त विनोद पांडेय के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। आदेश की प्रति प्राप्त होने पर तय गाइडलाइन के अनुसार आवारा कुत्तों की धरपकड अभियान चलाएंगे। जरवाय में डॉग शेल्टर हाउस के संचालन की जिम्मेदारी एनजीओ को दी जानी है। पशुचिकित्सा विभाग से डॉक्टर स्टॉफ उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही जोन स्तर पर कुत्तों के लिए फीडिंग जोन बनाने के लिए जगह तय की जा रही है।