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विडंबना : अंबिकापुर शहर से मात्र 3 किमी दूर गांव के लोग ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर

हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त लाल पानी निकलने लगा और पानी पीने योग्य नहीं रहा। इसका असर ग्रामीणों के सेहत पर भी दिखने लगा। इस वजह से ग्रामीण हैंडपंप के पानी का उपयोग करना छोड़ दिए हैं। इसके बाद ग्रामीणों की समस्या और बढ़ गई है।

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विडंबना : अंबिकापुर शहर से मात्र 3 किमी दूर गांव के लोग ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर

विडंबना : अंबिकापुर शहर से मात्र 3 किमी दूर गांव के लोग ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर

raipur/अंबिकापुर. अंबिकापुर शहर से लगे ग्राम पंचायत खैरबार स्थित खुद्दीपारा के ग्रामीण इन दिनों शुद्ध पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। खुद्दीपारा वार्ड की जनसंख्या करीब 1500 है। 2 वर्ष पूर्व ग्रामीणों की मांग पर जिला प्रशासन ने गांव में 2 हैंडपंप लगवाए थे, ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मिल सके और ग्रामीण बीमार न पड़े। हैंडपंप का उपयोग ग्रामीण महज कुछ ही दिनों तक कर सकें । हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त लाल पानी निकलने लगा और पानी पीने योग्य नहीं रहा। इसका असर ग्रामीणों के सेहत पर भी दिखने लगा। इस वजह से ग्रामीण हैंडपंप के पानी का उपयोग करना छोड़ दिए हैं। इसके बाद ग्रामीणों की समस्या और बढ़ गई है। शुद्ध पानी की तलाश में खुद्दीपारा के ग्रामीण गांव से लगे जंगल में ढोढ़ी बनाकर नाले के पानी का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों की सेहत के लिए ढोढ़ी का पानी और भी हानिकारक साबित हो रहा है। बावजूद इसके इस ओर न तो जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दे रहे हैं, और न ही जनप्रतिनिधियों का इस ओर ध्यान जा रहा है। सिस्टम की कार्यप्रणाली से बेबस ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हंै।
अमृत योजना के तहत की मांग, अधिकारियों ने नकारा
ग्रामीणों का कहना है कि अमृत योजना के तहत बांकी डेम से नगर निगम क्षेत्र में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम चल रहा है। वहीं योजना के लिए उनके गांव से होते हुए शहर तक पाइपलाइन बिछाई गई। इस दौरान ग्रामीणों ने मांग की कि उनके गांव में भी एक छोटी पाइपलाइन बिछा दी जाए। लेकिन अधिकारियों ने मना कर दिया और कहा कि यह योजना नगर निगम क्षेत्र के लिए है।

- जल्द शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
प्रदीप खलखो
कार्यपालन अभियंता, पीएचई विभाग