
समाज कल्याण विभाग 15 साल से विकलांग, विधवाओं और बुजुर्गो की सहायता केवल कागजों पर करता रहा
रायपुर। समाज कल्याण विभाग में 15 सालों में विकलांगों ,विधवाओं एवं बुजुर्गों की सहायता के नाम पर करोड़ों रुपए केवल कागजों में ही खर्च किए गए। हाल ही में आए हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है की सरकारी अधिकारियों द्वारा संगठित अपराध किया जा रहा है। विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को सुनियोजित एवं संगठित अपराध बताते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए गए हैं। पत्रिका द्वारा लगातार समाज कल्याण विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के विषय में खबरे प्रकाशित की जाती है परंतु अब तक शासन द्वारा दोषी अधिकारियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
हाईकोर्ट के आदेश अनुसार सीबीआई जांच से विभाग के अनेक घोटाले उजागर होने की संभावना है। पत्रिका को आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार विभाग के दोषी अधिकारियों द्वारा एक सरगना बनाकर विभाग में संचालित मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना, पेंशन योजना, विकलांगों को दिए जाने वाले ऋण योजना, कृत्रिम उपकरण प्रदान योजना, विकलांगों की संस्थाओं का संचालन ,अनुदान, निराश्रित निधि एवं पुनर्वास की संस्थाओं के संचालन सहित सभी योजनाओं में करोड़ों की राशि का गबन एवं दुरुपयोग किया जा रहा है।
समाज के सबसे निचले तबके के लोगों के उत्थान के लिए शासन द्वारा आवंटित की जाने वाली राशि के अधिकांश भाग को कतिपय भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा सुनियोजित तरीके से हड़पा जा रहा है जिसके कारण राज्य के अधिकतर विकलांग दुर्दशा एवं बदहाली की स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं। विकलांगों के शिक्षण प्रशिक्षण रोजगार तथा पुनर्वास के लिए अब तक राज्य में कोई भी कार्य नहीं किया गया है।
पहले भी लग चुके है कई आरोप
हाई कोर्ट द्वारा समाज कल्याण विभाग के जिन अधिकारियों को दोषी करार दिया गया है, उन पर पहले भी गंभीर घोटाले एवं आर्थिक अपराध के प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। वास्तविकता यह है कि समाज कल्याण विभाग के सभी अधिकारी अपनी जेब भरने में व्यस्त है जिसके कारण विकलांगो के विद्यालयों एवं पुनर्वास की संस्थाएं जर्जर एवं बदहाल है। वहां रहने वाले गरीब विकलांग दरिद्रता की हालत में जीवन यापन कर रहे हैं।
पत्रिका लगातार विकलांगों के पुनर्वास की संस्थाओं की बदहाली के विषय में खबरें प्रकाशित कर रहा है, जिसमें विकलांगों के लिए विशेष शौचालय नहीं होना, बाधा रहित एवं विकलांगों के लिए उपयुक्त भवनों की कमी के विषय में भी शासन का ध्यान आकृष्ट कर रहा है शासन द्वारा विकलांगों के लिए आरक्षित जगह पर विकलांगों को न तो जमीन दी जा रही है और ना ही दुकान। विभाग के कोई भी अधिकारी विकलांगों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए गंभीरतापूर्वक प्रयास नहीं कर रहे हैं जिसके कारण राज्य में विकलांग रोजगार स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण से कोसों दूर है और उन्हें समाज के उपयोगी अंग बनाने में शासन पूरी तरह से नाकामयाब है।
पुनर्वास केंद्र बदहाल स्थिति में
विभाग द्वारा विकलांगों के लिए अनेक पुनर्वास संस्थान खोले गए हैं परंतु सभी बदहाल एवं बंद की स्थिति में पड़े हैं। जो चालू है उनमें भी किसी भी प्रकार की पुनर्वास गतिविधियां जैसे फिजियो थेरेपी प्रशिक्षण शिक्षा तथा अन्य कोई भी सुविधाएं नहीं दी जा रही है सिर्फ राजधानी की ही बात करें तो यहां दर्जन भर से ज्यादा पुनर्वास केंद्र तथा कार्यालय का संचालन समाज कल्याण विभाग कर रहा है परंतु करोड़ों के खर्च के बाद भी पुनर्वास का कार्य शुन्य है समाज कल्याण विभाग में राजधानी के अंदर स्वालंबन सेंटर दिव्यांग महाविद्यालय ,राज्य संसाधन केंद्र, फिजिकल रेफरल संस्थान आदि सभी बंद के हालात में है केवल पैसों के लेनदेन के लिए इन संस्थाओं को नाम मात्र के लिए बनाया गया है।
व्यवस्थाओं को सुधारा जाएगा, कमियों को दूर किया जाएगा
सुधार व्यवस्था सुधारने के लिए ही हम लोग है, यदि कोई शिकायत आती है या संस्थाओं में कोई कमी है तो हम उस कमी को दूर करेंगे। हमारे पास अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। काम में कोई कमी है और मेरी जानकारी में आएगी तो हम उसे ठीक करेंगे। बच्चों की संस्थाओं में कई पद खाली है शासन से हमें आदेश मिलेगा तभी हम पदो को भर पाएंगे
आर. प्रसन्ना, सचिव समाज कल्याण विभाग
Published on:
02 Feb 2020 07:52 pm
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