
रायपुर. भूतप्रेत और आत्माएं अचानक ही किसी के जीवन में दखल नहीं देती बल्कि आपकी कुडंली के योग उन्हें आपकी ओर आकर्षित करते हैं। कुंडली के अनुसार ही भूत प्रेत आपको कष्ट देते हैं और चले भी जाते हैं। अगर आपको भूतों से डर लगता है तो जल्द से जल्द अपनी कुडंली किसी अच्छे जानकार को दिखाएं और भूत प्रेत बाधा निवारण के उपाए करें। कुंडली में बने योग के ही आत्माओं के प्रकार के प्रहार को भी निर्धारित करते हैं। जानिए कुडंली के योग जो आपके शरीर में भूतों की आहट का संकेत देती हैं।
पहला योग
कुण्डली के पहले भाव में चन्द्र के साथ राहु हो और पांचवे और नौवें भाव में क्रूर ग्रह स्थित हों। इस योग के होने पर जातक या जातिका पर भूत-प्रेत, पिशाच या गन्दी आत्माओं का प्रकोप शीघ्र होता है। यदि गोचर में भी यही स्थिति हो तो अवश्य ऊपरी बाधाएं तंग करती हैं।
दूसरा योग
यदि किसी कुण्डली में शनि, राहु, केतु या मंगल में से कोई भी ग्रह सप्तम भाव में हो तो ऐसे लोग भी भूत-प्रेत बाधा या पिशाच या ऊपरी हवा आदि से परेशान रहते हैं।
तीसरा योग
यदि किसी की कुण्डली में शनि-मंगल-राहु की युति हो तो उसे भी ऊपरी बाधा, प्रेत, पिशाच या भूत बाधा तंग करती है। उक्त योगों में दशा-अन्र्तदशा में भी ये ग्रह आते हों और गोचर में भी इन योगों की उपस्थिति हो तो समझ लें कि जातक या जातिका इस कष्ट से अवश्य परेशान है।
ज्योतिष के अनुसार राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा हो और चंद्र दशापति राहु से भाव 6, 8 या 12 में बलहीन हो, तो व्यक्ति पिशाच दोष से ग्रस्त होता है। वास्तुशास्त्र में भी उल्लेख है कि पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद, ज्येष्ठा, अनुराधा, स्वाति या भरणी नक्षत्र में शनि के स्थित होने पर शनिवार को गृह-निर्माण आरंभ नहीं करना चाहिए, अन्यथा वह घर राक्षसों, भूतों और पिशाचों से ग्रस्त हो जाएगा।
Published on:
31 Mar 2020 07:40 pm
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