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ISIS में भर्ती के लिए भारत के इस इलाके में चल रहा था ट्रेनिंग कैम्प, NIA की चार्जशीट में हुआ खुलासा

बोधगया ब्लास्ट मामले में एनआइए की स्पेशल कोर्ट ने 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इन आरोपियों का छत्तीसगढ़ से कनेक्शन है।

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दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन ISIS में भर्ती के लिए छत्तीसगढ़ में चल रहा था ट्रेनिंग कैम्प

रायपुर . राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की स्पेशल कोर्ट ने बिहार में बोधगया ब्लास्ट मामले में रायपुर के रहने वाले उमर सिद्दीकी व अजहरुद्दीन कुरैशी समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उम्रकैद की सजा पाने वालों में रायपुर को अपनी पनाहगाह बनाने वाला इस हमले का मास्टरमाइंड हैदर अली भी शामिल है। इन आतंकियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तत्कालीन मुख्यमंत्री गुजरात) पर भी हमले की साजिश रची थी।

गौरतलब है कि 7 जुलाई 2013 की सुबह बोधगया के महाबोधि मंदिर परिसर में एक के बाद एक 10 बम धमाके हुए थे, जिसमें 2 बौद्ध भिक्षुओं सहित 7 लोग घायल हुए थे। जिस जगह विस्फोट हुआ था, वहां उस वक्त वहां तकरीबन 200 प्रशिक्षु भिक्षु मौजूद थे। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा नवम्बर-दिसम्बर 2013 के बीच इंडियन मुजाहिदीन के समूचे टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश कर 16 लोगों की गिरफ्तारी की गई थी, जिनमें उमर सिद्दीकी और अजहरुद्दीन भी शामिल थे। जांच में पता चला कि बोधगया के बाद पटना ब्लास्ट को अंजाम देकर सभी आरोपी उमर और अजहरुद्दीन की मदद से रायपुर आ गए और यहीं के राजातालाब में रहने लगे।

मोदी पर हमले की रची थी साजिश
बोधगया को विस्फोटों से दहलाने वाला आतंकी हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी, उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी, मुजिबुल्लाह और इम्तियाज अंसारी को अंतत: उसके जुर्मों की सजा मिली है। बोधगया ब्लास्ट के जिन आरोपियों के खिलाफ एनआइए कोर्ट ने सजा सुनाई है, यही आरोपी 27 अक्टूबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में मोदी की हुंकार रैली के दौरान हुए ब्लास्ट के भी आरोपी है।

एनआइए की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि हैदर द्वारा नरेंद्र मोदी के खिलाफ रची जा रही साजिशों को लेकर रायपुर का उमर सिद्दीकी बेहद उत्साहित था। इसी दौरान उमर ने हैदर की मुलाकात रायपुर के ही दाउद से कराई। फिर हैदर 3 और 4 सितम्बर को अंबिकापुर गया और उसने वहां पर रेकी की। गौरतलब है कि 7 सितम्बर को मोदी ने अंबिकापुर में चुनावी रैली की थी, जब अंबिकापुर में साजिश कामयाब नहीं हुई, तो इन लोगों ने पटना ब्लास्ट को अंजाम दिया।

रायपुर में चला रहा था ट्रेनिंग कैम्प
हैदर, उमेर और उनकी टीम ने छत्तीसगढ़ में युवाओं को भर्ती के लिए अभियान चला रखा था। भारत में आइएसआइएस के लिए भर्ती अभियान की अगुवाई करने वाला सुल्तान अहमद अरमार उर्फ पुजारी छत्तीसगढ़ में ध्वस्त किए गए सिमी के स्लीपर सेल के सीधे संपर्क में था। गौरतलब है कि अलकायदा के लिए काम करते आए सुल्तान ने पटना और बोधगया ब्लास्ट से पहले मई 2013 में आइएसआइएस की सदस्यता लेकर ऑनलाइन शपथ ली थी। यानी जब रायपुर में हैदर अली, उमर सिद्दीकी और उनके साथी युवाओं को जिहाद के लिए उकसा रहे थे, तब सुल्तान आइएसआइएस की शरण में जा चुका था।

छत्तीसगढ़ के सिम कार्ड का किया इस्तेमाल
एनआइए की चार्जशीट में कहा गया है कि इन्हीं लोगों ने पिछले लोकसभा चुनाव से पूर्व पटना के गांधी मैदान के अलावा कानपुर एवं दिल्ली में मोदी पर हमले के लिए रेकी की थी, लेकिन साजिश में शामिल रायपुर के दाउद खान के डर जाने से उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। चौंका देने वाला तथ्य यह था कि पटना के गांधी मैदान और बोधगया विस्फोट में ज्यादातर आरोपियों ने जिन सिम कार्ड का इस्तेमाल किया, वो छत्तीसगढ़ से ही हासिल किए गए थे। एनआइए की रिपोर्ट की मानें, तो राजधानी रायपुर में रहकर इन लोगों ने बोधगया और पटना बम ब्लास्ट की साजिश रची थी। एनआइए की रिपोर्ट कहती है कि यह गिरोह इतना शातिर था कि बोधगया में सीरियल ब्लास्ट को उसने महज विस्फोटकों की मारक क्षमता का अंदाज लगाने के लिए अंजाम दिया था, जबकि उसके निशाने पर नरेंद्र मोदी थे।