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17 साल के इतिहास में पहली बार महापौर ने अपने ही प्रशासन के खिलाफ किया प्रदर्शन, खड़े हो गए बुलडोजर के सामने

महापौर देवेन्द्र यादव के खिलाफ न केवल प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया, बल्कि उनके साथ कई लोगों को गिरफ्तार कर केन्द्रीय जेल दुर्ग भेज दिया।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 02, 2018

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17 साल के इतिहास में पहली बार महापौर ने अपने ही प्रशासन के खिलाफ किया प्रदर्शन, खड़े हो गए बुलडोजर के सामने

भिलाई. निर्माणाधीन खुर्सीपार केनाल रोड में प्रभावितों का मकान तोडऩे का विरोध करने पर पुलिस ने महापौर देवेन्द्र यादव के खिलाफ न केवल प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया, बल्कि उनके साथ कई लोगों को गिरफ्तार कर केन्द्रीय जेल दुर्ग भेज दिया।

बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने महापौर को मुचलके पर रिहा भी कर दिया। नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम शुक्रवार को सुबह खुर्सीपार से नंदनी रोड पॉवर हाउस तक प्रस्तावित केनाल रोड में बाधित निर्माणों को तोडऩे कौशल नगर शिवाजी जोन-४ पहुंची।

प्रभावित लोगों ने अचानक तोडफ़ोड़ की कार्रवाई का विरोध किया। छावनी एसडीएम एसपी वैद्य और जोन आयुक्त संजय शर्मा से घरों का सामान खाली करने के लिए २-३ दिन की मोहलत मांगी। अधिकारियों ने मोहलत देने से मना कर दिया।

इससे नाराज कब्जेधारियों ने निगम प्रशासन और कैबिनेट मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।। विरोध के बीच निगम की टीम तोडफ़ोड़ की कार्रवाई करती रही। पांच बैकहो लोडर और एक चैन माउंटेन मशीन से से दो घंटे में कौशल नगर खुर्सीपार से मस्जिद चौक तक दर्जनभर मकानों को ढहा दिया।

एसपी के हस्तक्षेप के बाद बदल गई धाराएं
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में एसएसपी डॉ. संजीव शुक्ला को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। पहले पुलिस अनुविभागीय दंडाधिकारी बीबी पंचभाई की उपस्थिति में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ धारा १५१ के तहत प्रकरण दर्ज कर हस्ताक्षर करवा रहे थे। इस पर लोग जेल में बंद करने या फिर नि:शर्त रिहाई की मांग पर अड़ गए। तब एसएसपी के निर्देश पर सीएसपी वीरेन्द्र सतपथी प्रतिबंधात्मक धाराएं लगाई।

शहर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
खुर्सीपार से नंदनी रोड बायपास शहर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। ट्रांसपोर्ट नगर डबरापारा से नंदनी रोड पॉवर हाउस तक २८.८५ करोड़ की लागत से कोहका केनाल के ऊपर ३ किमी लंबा और १४ मी. चौड़ा बायपास निर्माण से जहां एनएच पर टै्र्रफिक का दबाव कम होगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए महापौर, महापौर परिषद और पार्षदों की अनुंशसा पर ही शासन ने फंड की स्वीकृत दी है।


१. ऐसा पहली बार हुआ है कि पुलिस को महापौर को गिरफ्तार करना पड़ा हो। प्रदेश में इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई।
२.ऐसा भी पहली बार हुआ है कि महापौर को अपने ही प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना पड़ा है। महापौर नगर पालिक निगम का मुखिया है। 17 साल के इतिहास में किसी भी महापौर ने अपने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन नहीं किया है।

महापौर को प्रदर्शनकारियों ने घेरा
दोपहर बाद महापौर देवेन्द्र यादव मौके पर पहुंचे तो प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया। विधिवत व्यवस्थापन तक तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को रोकने की मांग की। महापौर ने एसडीएम वैद्य, तहसीलदार अश्वनी शर्मा और जोन आयुक्त शर्मा से तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को रोकने कहा, लेकिन शर्मा ने निगम आयुक्त केएल चौहान के आदेश की जानकारी देते हुए कार्रवाई को रोकने से मना कर दिया। नाराज महापौर जेसीबी के सामने बैठ गए। पुलिस ने शा.काम में बाधा डालने वाले प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। केन्द्रीय जेल दुर्ग ले गए।

पड़ोसियों को बचाने आ गए बच्चे-बूढ़े
मोहल्ले के सभी लोग चिलचिलाती धूप में अपने पड़ोसियों के घर को बचाने के लिए एकजुट होकर डटे रहे। लोग अधिकारी के पीछे भागते रहे। कुछ ने तोडफ़ोड़ की कार्रवाई के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार बताया। तो कुछ मंत्री के दबाव में कार्रवाई की बात कही। जिनके घर टूट रहे थे वे अपनी मेहनत से जोड़ी एक-एक ईंट को बचाने की जुगत करते रहे।

कार्रवाई की चर्चा पूरे शहर में होती रही
तोडफ़ोड़ की कार्रवाई तो खुर्सीपार क्षेत्र के वार्ड-३३ के एक मोहल्ले में हुई। लेकिन नेताओं के दिनभर चले पॉलिटिकल ड्रामे की पूरे शहर में चर्चा रही। तोडफ़ोड़ की कार्रवाई को लेकर खुर्सीपार क्षेत्र में दिनभर गहमा गहमी का माहौल रहा।
१. तब महापौर और आयुक्त ने तत्परता क्यों नहीं दिखाई? - नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ने १५ दिन पहले राजधानी में नगरीय निकायों के विकास कार्यों की समीक्षा की थी। तब मंत्री ने अधिकारियों को ३० मई तक निर्माण कार्य से प्रभावितों का व्यवस्थापन के निर्देश दिए थे। बावजूद निगम आयुक्त केएल चौहान और महापौर ने व्यवस्थापन को लेकर तत्परता क्यों नहीं दिखाई?


२. क्या महापौर को सर्वे रिपोर्ट की जानकारी नहीं थी?- आखिर महापौर केनाल रोड के सर्वे को लेकर बार-बार सवाल क्यों उठा रहे हैं? क्या अधिकारियों ने महापौर को केनाल रोड के सर्वे रिपोर्ट की जानकारी नहीं दी है। यदि नहीं दी गई है तो किसके कहने पर नहीं दिया है? यदि दी गई है तो महापौर ने जो लोग सर्वे में छूट गए हैं, उनके लिए क्या किया?

महापौर देवेंद्र यादव ने बताया कि मकान अलॉट तो कर दिया, लेकिन चाबी नहीं दी। जिनको चाबी दी है, वहां बिजली नहीं है। मंत्री के दबाव में ऐसी परिस्थिति में भी लोगों को २४ घंटे की मोहलत तक नहीं दी गई। तानाशाही पूर्वक खदेड़ा गया। यह ठीक नहीं है। पूर्व विधायक बदरूद्दीन कुरैशी ने बताया कि अधिकारी मंत्री के दबाव में कार्रवाई कर रहे हैं। निगम ने नोटिस जारी कर तोडफ़ोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी। लोग स्वयं मकान छोड़कर जाना चाहते हैं, ४८ घंटे की मोहलत का नोटिस देकर समय से पहले कार्रवाई करना उचित नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष रिकेश सेन ने बताया कि महापौर ने खुद केनाल रोड का भूमिपूजन किया। उनकी मांग पर सरकार ने पैसा दिया। महापौर का आचरण निगम अधिनियम और लोकहित में नहीं है। उन्हें अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। महापौर को पद से हटाया जाना चाहिए। पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने बताया कि महापौर ने चुनाव के समय खुद को इंजीनियर बताया था, मगर वास्तविकता यह है कि वे 12वीं पास हैं।

महापौर का स्वभाव ही है, जो हैं, वह नहीं बताते। लोगों ने योग्य, परिपक्व और ऊर्जावान जानकार महापौर चुना था वह गलत साबित हुआ। जोन आयुक्त संजय शर्मा ने बताया कि चिन्हित लोगों को नोटिस जारी कर ४८ घंटे का मोहलत दी गई थी। चेतावनी के मुताबिक तोडफ़ोड़ की कार्रवाई की गई है। कार्रवाई जारी रहेगी। नंदनी रोड पावर हाउस तक कब्जा खाली कराया जाएगा।