
रायपुर@विष्णु ठाकुर. बदलती लाइफस्टाइल ने लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाला है। डायबिटिज टाइप-2 लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारी है। यह सिर्फ बड़ों को होती हैं, लेकिन अब युवाओं के साथ बच्चों में भी तेजी से डायबिटिज की बीमारी बढ़ रही है। बच्चों में टाइप-1 डायबिटिज होती है, जो जन्मजात और जेनेटिक होती है।
टाइप-1 डायबिटीज में बॉडी बिलकुल भी इंसुलिन नहीं बना पाती है। वहीं टाइप-2 में बॉडी अपर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का निर्माण करती है। टाइप-1 डायबिटीज के स्पष्ट कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। टाइप-1 के बच्चों को जिंदगीभर इंसुलिन का इंजेक्शन लगाना पड़ता है। इस तरह के मामले एम्स, डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जन्मजात बच्चों में बहुत ही कम मामले देखने को मिलते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ कुछ बच्चों में इसके मामले बढ़ रहे हैं। जो घातक साबित हो रहा है। उनकी आगे की जिंदगी काफी मुश्किल हो जाती है। ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखकर बच्चों को टाइप-1 डायबिटीज के खतरे से बचाया जा सकता है।
सांस व पेट संबंधी होती है परेशानी
एक स्टडी के अनुसार टाइप-1 डायबिटीज वाले शिशुओं और बच्चों में अन्य गंभीर बीमारियों के विकसित होने की संभावना उनके नॉन-डायबिटिक साथियों की तुलना में अधिक नहीं होती है। फिर भी, इस आयु वर्ग के बच्चों में अक्सर छोटी-मोटी सांस और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संबंधी बीमारियों का विकास होता है, जो उनकी डायबिटीज को बढ़ा सकते हैं या दिक्कत पैदा कर सकते हैं।
बच्चों में डायबिटिज के लक्षण
बच्चों में टाइप-1 डायबिटिज के लक्षण आमतौर पर जल्दी विकसित होते हैं। बार-बार प्यास, बार-बार पेशाब आना, बिस्तर गीला करना, अत्यधिक भूख, अनजाने में वजन कम होना, थकान, चिड़चिड़ापन या व्यवहार में परिवर्तन आदि लक्षण हो सकते हैं।
0 से 14 साल तक के बच्चे शामिल
महामारी नियंत्रक के संचालक डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना के तहत 365 बच्चे रजिस्टर्ड हैं। यह बच्चे 0 से 14 साल के बीच के हैं। इन बच्चों को फ्री इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, ग्लूकोस्ट्रीप के साथ आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। बच्चों को 21 साल की उम्र तक फ्री में इंसुलिन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद यह एडल्ट वाली योजना में मर्ज हो जाता है। ऐसे बच्चों की पहचान होने पर डायल-104 पर संपर्क किया जा सकता है।
8 से 10 साल के बच्चों में अधिक आ रहे मामले
जन्मजात किसी-किसी बच्चे को डायबिटिज की बीमारी होती है, जो जेनेटिक होता है। जन्मजात 1 हजार से 5 हजार बच्चों में से एक बच्चे को डायबिटिज होता है, लेकिन 8 से 10 सालों के बीच के बच्चों में डायबिटिज की समस्या देखने को मिल रही है। ऐसे बच्चे रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह भी टाइप-1 जेनेटिक डायबिटिज ही होता है।
- डॉ. निलय मोझरकर, शिशु रोग विशेषज्ञ
जिंदगीभर लेनी पड़ती है इंसुलिन
बच्चों में डायबिटिज खुद से होता है। ऐसे बच्चों में इंसुलिन बहुत जरूरी होता है। जन्मजात कमी के कारण इनमें दिक्कतें होती है। ऐसे बच्चों को जिंदगीभर इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता है। 98 फीसदी मामले ऐसे होते हैं जिसमें बेहोशी या सांस में दिक्कत के कारण बच्चे अस्पताल पहुंचते हैं, जब पता चलता है कि उन्हें डायबिटिज है।
- डॉ. ओंकार खंडवाल, एचओडी, शिशु रोग विभाग, आंबेडकर अस्पताल
Published on:
26 Dec 2022 07:11 pm
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