
जबरन धर्मांतरण कराने पर 20 साल तक की सजा (Photo AI)
CG conversion: @ राहुल जैन। विधानसभा के बजट में गुरुवार को दिन ऐतिहासिक रहा। प्रदेश 58 साल बाद जबरिया धर्मांतरण को रोकने के लिए विपक्ष की गैर मौजूदगी में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधयेक 2026 ध्वनिमत से पारित हुआ। डिप्टी सीएम व गृह मंत्री विजय शर्मा ने इसे सदन में पेश किया था। प्रदेश में इससे पहले वर्ष 1968 का कानून लागू था।
नए विधेयक में 20 साल तक की सजा और 25 लाख रुपए तक के जुर्माना का प्रावधान है। दोबारा जबरिया धर्मांतरण कराने पर आजीवन कारावास की सजा होगी। हालांकि विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका का हवाला देकर इसका विरोध किया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। इस पर डिप्टी सीएम ने कहा, कोई भी गंभीर चर्चा होती है तो विपक्ष के लोग बहिर्गमन या बहिष्कार कर के जाते हैं। इसे पलायन कहा जाना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा, 11 राज्यों के ऐसे ही मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित। ऐसे में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। विधेयक को विधानसभा की प्रवर समिति को सौंपना चाहिए।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट से कहीं कोई स्टे नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने ये नहीं कहा, इस पर नये कानून न बनाए जाए। राज्य सरकार चाहे तो कानून बना सकती है।
अब नए विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद इसका राजपत्र में प्रकाशन होगा और इसके साथ ही प्रदेशभर में नया विधेयक लागू हो जाएगा।
इस विधेयक में छह अध्यायों में 31 बिंदुओं में वैध-अवैध धर्मांतरण को परिभाषित करते हुए निहित सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। सामूहिक धर्मांतरण करने पर सजा के साथ 25 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा सजा और जुर्माना भी है।
Updated on:
20 Mar 2026 05:42 pm
Published on:
20 Mar 2026 05:40 pm
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