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Vat Savitri Puja 2021: वट सावित्री पूजा को लेकर संशय, किस दिन व्रत करना होगा श्रेष्ठ, जानें सही तिथि

Vat Savitri Puja 2021: इस बार वट सावित्री व्रत पूजन को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि पंचांगों में अमावस्या तिथि नौ और कैलेंडर में 10 जून को वट सावित्री पूजा करने का उल्लेख है। आइए जानते हैं किस दिन व्रत करना होगा श्रेष्ठ और जानें सही तिथि।
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रायपुर

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Ashish Gupta

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Updated: 9 Jun 2021, 8:29 AM IST

Doubts on Vat Savitri Worship Date

Vat Savitri Puja 2021: वट सावित्री पूजा को लेकर संशय, किस दिन व्रत करना होगा श्रेष्ठ, जानें सही तिथि

रायपुर. वट सावित्री का व्रत, पूजन देश में अलग-अलग तिथियों में मनाने का रिवाज है। इस बार वट सावित्री व्रत पूजन को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि पंचांगों में अमावस्या तिथि नौ और कैलेंडर में 10 जून को वट सावित्री पूजा (Vat Savitri Puja) करने का उल्लेख है। हालांकि पंडितों का कहना है कि जेष्ठ मास की चतुर्दशीयुक्त अमावस्या पर यह पूजन श्रेष्ठ माना गया है और नौ जून को ही वट सावित्री का पूजन करना उचित होगा।

पंडितों के अनुसार उत्तर भारत में जहां सुहागिनें यह पूजा-व्रत ज्येष्ठ मास की चतुर्दशी युक्त अमावस्या तिथि पर संपन्न करती हैं। वहीं दक्षिण भारत में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करती है। अर्थात 9 जून को राजधानी समेत प्रदेश में वट वृक्ष के नीचे बैठकर सुहागिनें पूजा और सावित्री माता की कथा का श्रवण करेंगे। शहर के पुरानी बस्ती में सौ साल पुराने वट वृक्ष की पूजा करने के लिए आसपास की कॉलोनियों और मोहल्लों से सुहागिनें आती हैं।

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पंडित चंद्रभूषण शुक्ला के अनुसार यह व्रत पूर्व पौराणिक कथा सावित्री ओर सत्यवान से जुड़ी हुई है। जब माता सावित्री ने अपने तपोबल से यमराज के यहां से अपने पति को जीवत लौटा लाईं। तभी से सुहागिनें ज्येष्ठ मास की चतुर्दशीयुत अमावस्या के दिन व्रत रखकर वट वृक्ष का पूजन कर 108 बार परिक्रमा करती हैं और सुहाग की सामग्री साड़ी, चूड़ियां, गहने, मेहंदी अर्पित करती हैं।

निर्णय सिंधु के अनुसार मान्य है
पंडित चंद्रभूषण के अनुसार वट सावित्री पूजन की तिथि को लेकर किसी तरह के भ्रम की स्थिति है। चतुर्दशी युक्ततिथि ही निर्णय सिंधु में मान्य है। यह तिथि 9 जून को है।

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पूजन विधान इस प्रकार है
इस व्रत को दोपहर में किए जाने का विधान है इसलिए दोपहर 1.30 बजे के बाद सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर पूजन सामग्री के साथ यह व्रत बरगद वृक्ष के नीचे विधि विधान से करती हैं। दीपक जलाकर बरगद वृक्ष की परिक्रमा करते हुए अपने पति की लंबी आयु की कामना करना चाहिए। चूंकि इस बार कोरोना का साया है, इसलिए भीड़ से बचते हुए और सोसल सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए पूजन संपन्न करें।

यह है पौराणिक कथा
वट वृक्ष की पूजा करके सावित्री ने अपने पति सत्यावान के प्राण को यमराज से वापस लौटा लाने में सफल हुई। तभी से इस व्रत को वट सावित्री व्रत पूजा के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार यह वृक्ष त्रिमूर्ति का प्रतीक है। इसकी छाल में भगवान विष्णु, जड़ में ब्रम्हा और शाखाओं में शिवजी का वास माना जाता है।