सावन में पहली बार मंडरा रहा सूखे का कहर, सरकार ने भी माना गंभीर स्थिति

सावन में पहली बार मंडरा रहा सूखे का कहर, सरकार ने भी माना गंभीर स्थिति

Akanksha Agrawal | Updated: 22 Jul 2019, 09:54:50 AM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ एक बार फिर सूखे की दहलीज (No rain in Chhattisgarh) पर खड़ा है। मानसून (Monsoon) की बेरूखी से किसानों की आंखें डबडबा रही है। 18 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के बाद हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं।

रायपुर. छत्तीसगढ़ एक बार फिर सूखे की दहलीज (No rainfall) पर खड़ा है। मानसून (Monsoon) की बेरूखी से किसानों की आंखें डबडबा रही है। 18 जिलों में सामान्य से कम बारिश (Weak monsoon) होने के बाद हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं। सरकार इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रही है। खुद कृषि मंत्री कह रहे हैं कि अगर एक हफ्ते और बेहतर बारिश नहीं हुई तो राज्य सूखे की चपेट में आ जाएगा।

मानसून के रूठने से 50 फीसदी खेतों में धान की बोआई तक नहीं हुई है, जहां धान की बोआई हो चुकी है, वहां धूप से पौधे जल रहे हैं। दुर्ग, बेमेतरा और राजनांदगांव जिले बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। उधर जहां धान के पौधे निकल गए थे, पानी की कमीं से सूखने लगे हैं। ऐसे में कुछ जगह किसानों ने मवेशियों को खेतों में छोड़ दिया है।

प्रदेश में अब तक 24 फीसदी कम बारिश
प्रदेश में अब तक 24 फीसदी कम बारिश हुई है। 1 जून से 21 जुलाई के बीच औसतन 444.6 मिमी बारिश होनी चाहिए लेकिन अब तक 338.5 मिमी बारिश ही हुई है। केवल कोंडागांव में औसत से 38 प्रतिशत अधिक बारिश है। मौसम विभाग (Meteorological department) 8 जिले में सामान्य बारिश मान रहा है जबकि इनमें से नारायणपुर और धमतरी को छोडकऱ अन्य जिलों में बारिश प्रतिशत कम ही है। सबसे कम बारिश सरगुजा में हुई है।

कृषि विभाग ने विकल्प सुझाए
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और कृषि विभाग ने धान की जल्दी पकने वाली किस्में जैसे तुलसी, आदित्या, कलिंगा-3, समलेश्वरी, वनप्रभा, इंदिरा आर-1, इंदिरा बारानी आर-1 लगाने का सुझाव दिया है। इन किस्मों के बीज कृषि विवि, कृषि विज्ञान (Agriculture Science) केंद्रों एवं अनुसंधान प्रक्षेत्रों में उपलब्ध हैं। धान की बोआई करना संभव न हो तो वहां शीघ्र पकने वाली मूंग की पूसा विशाल, उड़द की किस्मों की बुआई का विकल्प बताया गया है।

खेती पिछड़ चुकी है
इंदिरा गांधी कृषि विवि के एग्रोमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो जीके दास ने बताया कि कृषि विवि के केंद्रीय रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर सभी 27 जिलों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना बनाई है। इसे कृषि विभाग के साथ मिलकर पूरा करना है। हवा का दबाव कम ज्यादा होने की वजह से छत्तीसगढ़ में बरसने वाला मानसून ओडिशा, झारखंड और पं बंगाल की ओर से बढ़ गया है। एक दो दिन में सिस्टम बनने की उम्मीद की जा रही है। अभी भी बारिश होने पर स्थिति में सुधार हो सकता है। कमजोर मानसून से हमारी खेती पिछड़ चुकी है।

तीन चार दिन में बारिश की संभावना
मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि केंद्रीय मौसम विभाग नई दिल्ली ने छत्तीसगढ़ में 100 फीसदी की बारिश का अनुमान लगाया है। सही समय पर बारिश नहीं होने की स्थिति हर साल रहती है। अब अलनीनो का प्रभाव खत्म हो चुका है। इसके बाद सिस्टम बनते हैं। छत्तीसगढ़ में मानसून दक्षिणी छत्तीसगढ़ के ऊपर से गुजर गया। तीन चार दिन के अंदर बारिश की संभावना है।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे से बातचीत
सवाल: प्रदेश में कम बारिश के कारण किसान परेशान हैं?
जवाब: स्थिति बेहद गंभीर है, राज्य सरकार इस बात से वाकिफ है।

सवाल: राज्य सूखे की दहलीज पर है?
जवाब: वर्तमान हालत एक चिंताजनक हैं। एक हफ्ते और बारिश नहीं हुई तो हम निश्चित तौर पर कठिन स्थिति में पहुंच जाएंगे। बारिश नहीं होने से अब खेतों में पड़े धान को नुकसान होना शुरू हो चुका है।

सवाल: कुछ जगहों में तो किसान खेतों में मवेशी छोड़ रहे हैं?
जवाब: किसान चिंतित हैं, लेकिन उम्मीद अभी भी बनी हुई है। किसानों के साथ सरकार को भी बारिश का इंतजार है। अभी भी अच्छी बारिश हुई तो खेतों में जो बीच पड़े हैं, उनमें जान आ सकती है। लेकिन यह मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगा।

सवाल: विभाग की क्या तैयारी है?
जवाब: विभग ने अर्ली वैरायटी के बीजों को कृषि सोसायटी में पहुंचा दिया है। बारिश होने की स्थिति में किसान इसका उपयोग कर सकते हैं। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे गावों में टीमों का दौरा कराएं। किसानों के संपर्क में रहे और विकल्पों पर बतचीत करते रहें।

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