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social pride: उत्सव कोई सा भी हो, अब बचा हुआ भोजन नहीं होगा व्यर्थ ….जानिए कैसे

social pride: रायपुर. उतना लें थाली में, व्यर्थ ना जाए नाली में, इस सूत्र वाक्य के साथ सामाजिक दायित्वों और सरोकार की दिशा में एक अच्छी पहल हुई है।

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शहर की एसे कई सामाजिक संस्थाओं ने लोगों की चिंता की है। शहर में एसी कई संस्थाएं सामने आई, जिन्होंने अपने समाज के एजेंडें में जरुरतमंदों को शामिल किया है कि उन तक भोजन पहुंचाएंगे।

यह तक किया है कि घर, परिवार हो या समाज में कोई भी उत्सव कार्यक्रम, जहां सैकड़ों लोगों को भोजन पर आमंत्रित किया जाता है, वहां भोजन यदि बच जाता है तो यूं ही व्यर्थ नहीं फेंकेंगे, बल्कि जरूरतमंदों के बीच, बस्तियों में पहुंचाएंगे। ताकि भोजन सार्थकता हो सके और लोगों की भूख मिटाने में मददगार। दरअसल, शादी समारोह, धार्मिक आयोजन, जन्मदिन जैसे उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। एेसे कार्यक्रमों में सैकड़ों लोगों के लिए भोजन बच जाता है, वह अब व्यर्थ नहीं जाएगा।

इन संस्थाओं ने अमल में लाया

छत्तीसगढ़ प्रादेशिक माहेश्वरी सभा

अध्यक्ष रामरतन मूंदड़ा बताते हैं कि दो साल पहले अखिल भारतीय महासभा का सम्मेलन जोधपुर राजस्थान में हुआ था, जिसमें अनेक प्रांतों से समाज के पदाधिकारी और सदस्य पहुंचे हुए थे। उसमें तय किया कि उतना ही लें थ्राली में, व्यर्थ न जाए नाली में। इस सूत्र वाक्य को अपनाया है। तब से शादी समारोह, सालगिरह, जन्मदिन, धार्मिक कार्यक्रमों में बचा हुआ भोजन फेंकेंगे नहीं, बल्कि जरूरतमंदों में बांटने का निश्चय किया है।

छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन संस्था

चेयरमैन अशोक अग्रवाल बताते हैं कि सामाजिक समारोह में बचा हुआ भोजन फेंकने पर पूरी तरह से रोक लगया हुआ है। सामाजिक बैठकों और सम्मेलन में इस बात पर जोर देते हैं कि अन्न का अपमान, भगवान का अपमान करना जैसा है, इसलिए उसका सदुपयोग अधिक से अधिक जरूरतमंदों के बीच करना तय किए हैं। इस उद्देश्य से अग्रसेन रसोई रामसागरपारा में खोल दिया था।

वैश्य महासम्मेलन

अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री राजकुमार राठी ने बताया कि उनके इस संगठन में कोरोबार क्षेत्र से जुड़े हर जाति और धर्म के लोग शामिल हैं। सभी ने मिलकर मदद और सहयोग की भावना की दिशा में अधिक से अधिक काम करना तय किया है। उत्सव के किसी भी कार्यक्रम में बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं।

अवाम-ए-हिंद संस्था का भोजन सेवा फिर बंद नहीं हुई

अवाम-ए-हिंद संस्था अपने सामाजीक और सरोकारों के साथ आगे बढी़, जब कोरोनाकाल का संकट गहराया तो भोजन सेवा शुरू किया। फिर उस सेवा को जरूरतमंदों के लिए निरंतर जारी रखा। सर्दी हो बरसात, कोई तीज-त्योहार, उत्सव का अवसर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अंबेडकर, डीकेएस हास्पिटल जैसी जगहों पर भोजन मुहैया कराने को सुपोषण अभियान का रूप दिया। संस्था के संस्थापक मोहम्मद सज्जाद खान ने बताया कि आज भोजन सेवा को ४०२ दिन पूरे हो चुके हैं। जिसमें सदस्यों का भी पूरा सहयोग मिला है।

तृप्तांजलि सेवा में कई लोग जुड़े

चरामेति संस्था ने एम्स के सामने तृप्तांजलि की शुरुआत की तो उसमें कई लोग जुड़ते चले गए। राजेंद्र ओझा बताते हैं कि एम्स में अनेक जगहों से लोग आते हैं। यह सोच कर अस्पताल के ठीक सामने एक मंदिर परिसर में भोजन वितरित की सेवा सप्ताह में एक दिन आज तक चल रही है।