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देश की एकमात्र सीट जहां महिला प्रत्याशी उतारने से कांपते हैं बीजेपी-कांग्रेस

Lok Sabha Election 2024: पहले लोकसभा आम चुनाव 1952 में रायपुर सीट से कांग्रेस के महिला उम्मीदवार मिनी माता ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1957 और 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस की महिला प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी...

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Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव में रायपुर सीट की अजब-गजब कहानी है। कभी कांग्रेस के गढ़ वाली सीट पर भाजपा ने लंबे अरसे के बाद भेदने में सफलता पाई। तब से यह सीट भाजपा के कब्जे में है। पहले लोकसभा आम चुनाव 1952 में रायपुर सीट से कांग्रेस के महिला उम्मीदवार मिनी माता ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1957 और 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस की महिला प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। 1952 के चुनाव में कांग्रेस से मिनीमाता अगम दास गुरु ने चुनाव जीता। 1957 और 1962 के हुए चुनाव में कांग्रेस से ही केशर कुमारी देवी लगातार दो बार चुनाव जीता। इसके बाद न तो कांग्रेस ने न ही जनता पार्टी (अब भाजपा) ने इस सीट से महिला को प्रत्याशी बनाया।

1989 को लोकसभा चुनाव में भाजपा से रमेश बैस को प्रत्याशी बनाया गया था। इस चुनाव में रमेश बैस ने जीत दर्ज की थी। लेकिन दो साल तक ही सांसद रह पाए। देश में 1991 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस से विद्याचरण शुक्ल ने जीत दर्ज की थी। 1996 में हुए चुनाव में रमेश बैस ने रायपुर सीट से दर्ज की। इसके बाद वे लगातार 2014 तक हर चुनाव में जीत दर्ज करते रहे। इस तरह वे पहली बार दो साल के लिए बाद में वे लगातार 20 साल तक सांसद रहे। इस तरह से रायपुर लोकसभा सीट 1996 से भाजपा गढ़ बना हुआ है।

लगातार कांग्रेस की सरकार देश में बन रही थी। 1977 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया था। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के पुरुषोत्तम कौशिक ने रायपुर लोकसभा सीट रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद हुए दो चुनाव 1980 और 1984 में कांग्रेस प्रत्याशी केयर भूषण ने जीत दर्ज की।

रायपुर लोकसभा सीट 1952 से 1971 तक कांग्रेस गढ़ रहा। इसके बाद कभी जनता पार्टी तो कभी भाजपा बीच-बीच में सेंध लगाती रही। 1977 में जनता पार्टी ने कांग्रेस का गढ़ भेदने में सफल रही, तो 1989 में भाजपा गढ़ भेदने में सफल रही। इसके बाद फिर से कांग्रेस प्रत्याशी विद्याचरण शुक्ल ने 1991 के चुनाव में इस सीट पर कब्जा कर लिया। लेकिन सिर्फ पांच साल के लिए। इसके बाद इस सीट पर कांग्रेस कभी चुनाव नहीं जीत पाई।

1952 मिनीमाता अगम दास गुरु कांग्रेस

1957 केशर कुमारी देवी कांग्रेस

1962 केशर कुमारी देवी कांग्रेस

1967 लखन लाल गुप्ता कांग्रेस

1971 विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस

1977 पुरूषोत्तम कौशिक जनता पार्टी

1980 केयूर भूषण कांग्रेस

1984 केयूर भूषण कांग्रेस

1989 रमेश बैस भाजपा

1991 विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस

1996 रमेश बैस भाजपा

1998 रमेश बैस भाजपा

1999 रमेश बैस भाजपा

2004 रमेश बैस भाजपा

2009 रमेश बैस भाजपा

2014 रमेश बैस भाजपा

2019 सुनील कुमार सोनी भाजपा