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…आखिर महिलाओं में क्यों आती है माता?

क्या किसी इंसान के शरीर में देवी मां की छाया नजर आ सकती है। क्या कोई इंसान देवी का रूप धारण कर अंगारों पर चल सकता है। आइए आस्था और अंधविश्वास की इस कड़ी में हम जानते हैं देवी उनके शरीर में किस तरह प्रवेश कर अपने भक्तों का कल्याण करती है और उनके दुख-दर्द कैसे दूर करती है।

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...आखिर महिलाओं में क्यों आती है माता?

प्रतिकात्मक फोटो

रायपुर। सभी जगह नवरात्रि का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। लोग जगह-जगह पंडाल लगाकर नवदुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं, गरबा का क्रेज तो युवक-युवतियों के सिर चढक़र बोलता है। नवरात्रि के समय महिलाओं पर देवी (माता) आती है तो कुछ पुरुषों में शेर या काल भैरव प्रवेश करते हैं।

क्या किसी इंसान के शरीर में देवी मां की छाया नजर आ सकती है। क्या कोई इंसान देवी का रूप धारण कर अंगारों पर चल सकता है। आइए आस्था और अंधविश्वास की इस कड़ी में हम जानते हैं देवी उनके शरीर में किस तरह प्रवेश कर अपने भक्तों का कल्याण करती है और उनके दुख-दर्द कैसे दूर करती है।

अजीबो-गरीब ढंग से करते हैं व्यवहार
मंदिर में आरती शुरू होते ही कुछ महिलाओं में देवी (माता) तो कुछ पुरुषों में देवी का वाहन शेर या काल भैरव प्रवेश करते हैं और ये अजीबो-गरीब ढंग से व्यवहार करते हुए स्वयं भी देवी की आराधना करते हैं तथा देवी के रूप में भक्तों को आशीर्वाद भी देते हैं। इन लोगों में देवी का शरीर में आगमन होने का जुनून इस हद तक होता है कि ये जलता हुआ कपूर अपनी जुबान पर रखकर देवी की आरती उतारते हैं तो कुछ हाथ में जलता कपूर लेकर देवी की आरती करते हैं।

आस्था या अंधविश्वास
क्या वाकई भक्तों का इस तरह से शरीर में प्रकट होने वाली देवी की आराधना करना आस्था का प्रतीक है? क्या मां का अपने भक्तों के शरीर में प्रवेश करने को सच्चाई माना जा सकता है या यह केवल भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करने का जरिया मात्र है? कुछ लोग ये भी कहते हैं कि कुछ महिलाएं फायदा उठाने के लिए जान बूझकर ऐसा नाटक भी करती है। ज्योतिष के अनुसार यह ऐसा होता भी है माता अपने भक्तों को कभी निराश नहीं देखती है वह किसी भी रूप में आ सकती है।

मनोवैज्ञानिक बीमारी
डॉक्टर कहते हैं कि ऐसा किसी मनोवैज्ञानिक बीमारी के कारण होता है। विज्ञान का मानना ये है कि जब व्यक्ति जिसका दिमाग कमजोर होता है वो एक ही चीज़ के बारे में बार-बार सोचता है। जैसे की रात्रि के समय अगर वो माता के बारे में ही सोचता रहेगा उतने समय तक तो उसका दिमाग यही सोचने लगता है। उसके बाद उसे वैसा ही महसूस होता है जैसा वो दिमाग में सोचता है। आपको क्या लगता है, अपनी राय से हमें जरूर अवगत कराएं।