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World Homoeopathy Day: मीठी गोलियों पर बढ़ा भरोसा: छत्तीसगढ़ में 30-40% लोग अपना रहे होम्योपैथी, इन गंभीर बीमारियों का भी हो रहा इलाज

World Homoeopathy Day: मीठी गोलियों के रूप में जानी जाने वाली इस चिकित्सा पद्धति को अब 30-40% लोग अपना रहे हैं। खासकर एलर्जी, स्किन और बच्चों से जुड़ी बीमारियों में मरीजों का रुझान तेजी से बढ़ा है।

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विश्व होम्योपैथी दिवस (फोटो सोर्स- पत्रिका)

विश्व होम्योपैथी दिवस (फोटो सोर्स- पत्रिका)

World Homoeopathy Day 2026: तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के बीच छत्तीसगढ़ में लोग अब सुरक्षित और कम साइड इफेक्ट वाले इलाज की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। राज्य में करीब 30–40% लोग किसी न किसी रूप में होम्योपैथी का उपयोग कर रहे हैं। वहीं, क्लिनिकों में रोजाना 20 से 60 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। खासकर एलर्जी, त्वचा रोग, माइग्रेन और बच्चों की बीमारियों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है, जो इस पद्धति के जनक सैमुअल हैनीमैन (Samuel Hahnemann) की जयंती है।

World Homoeopathy Day 2026: होम्योपैथी का इतिहास: जानें कैसे हुई शुरुआत

रायपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. तनेश्वर ताम्रकार (BHMS, MD) के अनुसार, होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनीमैन का जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के मीसेन नगर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने एलोपैथी में एम.डी. की डिग्री प्राप्त की और चिकित्सकीय कार्य के साथ-साथ रसायन विज्ञान में भी गहरी पकड़ बनाई।

डॉ. ताम्रकार बताते हैं कि एक समय वे डॉ. कुलेन की ‘मटेरिया मेडिका’ का अनुवाद कर रहे थे। इसी दौरान कुनैन नामक दवा पर काम करते हुए उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रयोग किया। उन्होंने पाया कि कुनैन स्वस्थ व्यक्ति में मलेरिया जैसे लक्षण उत्पन्न करती है, जबकि वही दवा मलेरिया के मरीज को ठीक कर देती है। इसी आधार पर उन्होंने सिद्धांत दिया- “जैसा रोग, वैसी दवा” यही सिद्धांत आगे चलकर होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का आधार बना और वर्ष 1790 में इसकी स्थापना हुई। आज दुनिया भर में इस पद्धति का उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार में किया जा रहा है।

रायपुर में बढ़ रहा ट्रेंड, रोज 20-30 मरीज

रायपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. तनेश्वर ताम्रकार (BHMS, MD) के अनुसार, रोजाना 20-25 मरीज आते हैं, जिनमें 4-5 नए मरीज होते हैं, जबकि बाकी फॉलोअप के लिए आते हैं। पुराने रोगों में समय अधिक लगता है, लेकिन परिणाम स्थायी मिलते हैं।” वहीं, निजी क्लिनिक संचालक डॉ. लिलेश गौतम और डॉ. तेजश्वनी गौतम बताते हैं कि उनके क्लिनिक में रोजाना औसतन 25-30 मरीज पहुंच रहे हैं और पिछले 2-3 वर्षों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है।

इन बीमारियों के लिए सबसे ज्यादा पहुंच रहे मरीज

  • एलर्जी और सर्दी-खांसी
  • त्वचा रोग, मुंहासे और बाल झड़ना
  • थायराइड और हार्मोनल समस्या
  • माइग्रेन, गैस-एसिडिटी
  • जोड़ों का दर्द, पाइल्स

बच्चों के इलाज में भी बढ़ा भरोसा

बच्चों में भी होम्योपैथी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। बार-बार सर्दी-खांसी, दांत निकलने के दौरान परेशानी और इम्यूनिटी से जुड़ी समस्याओं में माता-पिता इसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। अभिभावक शिल्की ओझा के अनुसार, “मेरे बच्चे को हर महीने सर्दी-खांसी होती थी और एंटीबायोटिक देनी पड़ती थी। होम्योपैथी शुरू करने के बाद 4-6 महीने में काफी सुधार हुआ और अब बच्चा कम बीमार पड़ता है।”

केस स्टडी: मरीजों को मिला राहत

लकवा के बाद सुधार: 90 वर्षीय श्रीमती चंदा को स्ट्रोक के बाद लकवा हो गया था। होम्योपैथिक इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वे धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों में लौटने लगीं। - डॉ. तनेश्वर ताम्रकार (BHMS, MD) प्रोफेसर, रायपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज अस्पताल

थायराइड से मिली राहत: 37 वर्षीय श्रीमती गायत्री हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित थीं। कुछ महीनों के होम्योपैथिक उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और अब पिछले 3 वर्षों से उनका थायराइड सामान्य है।

घुटनों के दर्द से राहत: 65 वर्षीय पंचराम घुटनों के गंभीर दर्द से परेशान थे। इलाज के बाद अब वे सामान्य रूप से चल-फिर पा रहे हैं और दैनिक कार्य कर रहे हैं।

डॉक्टर की राय: जड़ से इलाज पर फोकस

डॉ. तनेश्वर ताम्रकार बताते हैं- “होम्योपैथी ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसमें मरीज के शारीरिक के साथ मानसिक लक्षणों को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारी की जड़ पर काम करती है।”

डॉ. लिलेश गौतम के अनुसार, “होम्योपैथी में इलाज के साथ मरीज का भरोसा जीतना भी जरूरी होता है, यही कारण है कि लोग तेजी से इसकी ओर बढ़ रहे हैं।”

डॉ. तेजश्वनी गौतम के अनुसार, “एलोपैथी में जहां त्वरित राहत मिलती है, वहीं होम्योपैथी में धीरे-धीरे लेकिन स्थायी सुधार होता है। हालांकि, इमरजेंसी में एलोपैथी जरूरी है।”

सरकारी व्यवस्था में कमी, डॉक्टरों की कमी भी चुनौती

डॉक्टरों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी का विस्तार अभी शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। ग्रामीण इलाकों में सरकारी दवाखानों में दवाओं और सुविधाओं की कमी देखने को मिलती है। राज्य में लगभग 3000 होम्योपैथिक डॉक्टर पंजीकृत हैं, लेकिन सरकारी सेवाओं में केवल 150-200 ही कार्यरत हैं। ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों में होम्योपैथिक डिस्पेंसरी की जरूरत है, ताकि आम लोगों को आसानी से यह सुविधा मिल सके।

भविष्य में बढ़ेगा दायरा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी का दायरा और तेजी से बढ़ेगा। डॉ. तेजश्वनी गौतम के अनुसार, “राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सरकार ने नए होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की घोषणा की है। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के नए अवसर भी खुलेंगे।”

फैक्ट फाइल

  • विषय आंकड़े / विवरण
  • उपयोग कर रहे लोग: 30-40% लोग
  • रोजाना मरीज (क्लिनिक): प्रो. डॉ. तनेश्वर ताम्रकार: 20-25 (4–5 नए)
  • डॉ. लिलेश और डॉ. तेजश्वनी गौतम: 25–30

सरकारी स्थिति

  • पंजीकृत डॉक्टर: 3000
  • सरकारी सेवाओं में कार्यरत: 150-200
  • ग्रामीण इलाकों में दवा/सुविधा की कमी