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आगे आए ग्रामीण और स्वंय संचालित करने लगे गौशाला

ग्राम पंचायत चिगंवाड़ा में पन्द्रह माह से बनकर तैयार थी गौशाला, अफसरों ने ध्यान नहीं दिया तो ग्रामीणों ने संचालन समिति बना ली।ग्रामीणों ने राशि एकत्रित कर गौशाला में रखे कर्मचारी।सिलवानी. चिंगवाड़ा में गौशाला का संचालन करने में जुटे ग्रामवासी।

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आगे आए ग्रामीण और स्वंय संचालित करने लगे गौशाला

आगे आए ग्रामीण और स्वंय संचालित करने लगे गौशाला

रायसेन. यदि एक हाथ की पांचों उंगलियां मिल जाएं तो वह मुठ्ठी बन जाती है। इसी तरह यदि लोग सामूहिक रुप से जनसेवा कार्य के लिए कदम बढ़ाते हैं, तो वहां प्रयास सार्थक हो जाते। कुछ ऐसा ही सिलवानी तहसील के गांव चिंगवाड़ा के लोगों ने कर दिखाया है। खेतों में लहलहाती फसल को पशु चट कर जाते थे। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से मवेशियों को पकड़वाने की गुहार लगाई। लेकिन अफसरों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो ग्रामवासियों ने एकजुट होकर गांव में नव निर्मित गौशाला को संचालित करने का निर्णय लिया।
पन्द्रह माह से बनकर थी तैयार गौशाला
चिंगवाड़ा कला ग्राम पंचायत में 15 माह पूर्व गौशाला का निर्माण प्रारंभ किया गया था, जो आज डेंटिंग पेंटिंग के साथ बनकर तैयार दिखाई दे रही है। लेकिन स्थानीय पंचायत प्रबंधन की उदासीनता के कारण 15 महीने का समय व्यतीत होने के बाद भी बिजली पानी सहित भूसा चारे की व्यवस्था न होने के कारण बंद पड़ी थी। जब ग्रामीणों ने इस कार्य की शुरुआत कर दी तो जनपद पंचायत सीईओ ने औपचारिकता निभाते हुए तीन सीएफएल लैंप प्रदान कर दिए।
ऐसे किया जा रहा संचालन
प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से परेशान ग्रामीणों ने एक बैठक आयोजित कर ग्राम स्तर पर गौशाला संचालन के लिए समिति बनाई। इसके बाद राशि एकत्रित की गई। फिर इसका संचालन शुरु कर दिया गया। संचालन समिति ने चंदे से प्राप्त राशि से तीन कर्मियों को छह हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय पर नियुक्त किया। गौशाला में पानी के लिए कोई संसाधन नहीं होने पर लगभग दो किलोमीटर दूर नदी से पशुओं को पानी पिलाने के लिए एक व्यक्ति को दो हजार प्रतिमाह के मानदेय पर तैयार किया गया।
जब ग्रामीणों ने इस कार्य की शुरुआत कर दी तो जनपद पंचायत सीईओ ने
औपचारिकता निभाते हुए तीन सीएफएल लैंप प्रदान कर दिए।
बना लिया भूसा बंैक
पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था को लेकर चिंतित किसानों ने स्वंय का भूसा बैंक लिया। इससे न सिर्फ गांव की, बल्कि आसपास के गांवों की फसलें भी सुरक्षित हो रही है। ग्रामीण और किसान पशुओं की समस्या से जूझ रहे थे। किसान सर्द मौसम की रातों में जाग कर खेतों की रखवाली करने को मजबूर थे। सिस्टम से गुहार लगाई, माननीयों से पुकार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इस काम में ग्रामीणों ने चंदा इकठ्ठा कर हजारों रुपए खर्च किए।
गौशालाओं का निर्माण अधूरा
विकासखंड में ग्राम पंचायत चिंगवाड़ा, सांईखेड़ा सहित अन्य ग्राम पंचायतों में गौशाला बन रही हैं, लेकिन कई जगह निर्माण अधूरा पड़ा है। गौशाला निर्माण के लिए शासन द्वारा मनरेगा मद से ३७ लाख रुपए दिए जा रहे हैं।
जिससे गायों को आसरा के साथ बेहतर सुविधा मिल सके।