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विवादित थी ओशो की रियल लाइफ, आश्रम में इन बातों की थी खुली आजादी

19 जनवरी को ओशो की पुण्य तिथि है, इस मौके पर पत्रिका.काम पर पेश है उनकी विवादित जिंदगी से जुड़ी प्रमुख बातें...।

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रायसेन। एक समय में ओशो अपने शिखर पर पहुंच गए थे। इस शख्स ने न सिर्फ देश और विदेशों में भी बहुत नाम कमाया और अकूत दौलत भी कमाई। दुनियाभर के लोग जिसे पूजने लगे थे, कई फिल्म स्टार भी उनके भक्त हो गए थे, लेकिन ओशो की जिंदकी आज भी विवादित है। उनके साथ कई वर्षों तक साथ रही एक शिष्या ने अपनी किताब में कई किस्से उजागर किए थे।

आचार्च रजनीश विवादित आध्यात्मिक नेता बन चुके थे। 70 से 80 के बीच का यह वक्त था, तब वे शिखर पर थे। उनकी लोकप्रियता दुनियाभर में इतनी बढ़ गई थी कि वे अपने आप को भगवान श्री रजनीश के नाम से संबोधन सुनकर बेहद खुश होने लगे थे। अपने आप को भगवान कहलवाने के विवादों के बाद उन्होंने अपना नाम 'ओशो' कर लिया था।

रायसेन जिले में हुआ था जन्म

ओशो का जन्म मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाडा गांव में हुआ था। अपने भक्तों के बीच भगवान कहलाने वाले ओशो उर्फ़ रजनीश को लेकर कई विवाद भी सामने आए हैं, जिनमें से कई खुद उनकी शिष्या और प्रेमिका रही मां आनंद शीला ने अपनी किताब में लगा चुकी हैं। आचार्य रजनीश यानी चंद्रमोहन जैन 'ओशो' आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अनुयायी आज भी दुनियाभर में मौजूद हैं।

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जब आश्रम में उजागर हुआ घोटाला

उन पर आरोप लगा था कि रजनीश के आश्रम से 55 मिलियन डॉलर का घपला हुआ, जिसमें उनकी शिष्या शीला को 39 माह जेल में बिताने पड़े। जेल से निकलने के 20 वर्ष बाद उनकी शिष्या शीला ने एक किताब लिखी थी, जिसके माध्यम से उन्होंने कई अनछुहे पहलुओं को उजागर कर दिया था। इस किताब का नाम था 'डोंट किल हिम! ए मेम्बर बाई मा आनंद शीला"।

90 लोगों के साथ होता था यह काम

प्रेमिका शीला की किताब के मुताबिक ओशो के आश्रम में अध्यात्म के नाम पर सेक्स की मंडी लगाई जाती थी। आश्रम में जो शिविर होते थे, उसमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय सेक्स ही होता। इन्हीं आश्रमों में खुलेआम यह काम होने लगा था।
ओशो खुद अपने भक्तों को इस बारे में बताते थे और कहते कि इसकी इच्छा को दबाना नहीं चाहिए, ये कई कष्टों का कारण बन सकता है। वे कहते कि इसे बिना किसी निर्णय के ‌स्वीकार करना सीखो। इस तरह भक्तों की नजरों में भगवान का दर्जा पाए ओशो के उपदेशों को दर्शक सहर्ष स्वीकार करते और बिना किसी हिचकिचाहट और दबाव के आश्रम में ही ऐसा ही करने लगे थे। किताब में इस बात का भी जिक्र है कि आश्रम का हर संन्यासी माह में 90 लोगों के साथ सेक्स करता था।

बीमारी में भी यही थी प्राथमिकता

ओशो के आश्रम में संन्यासी शिफ्ट में आते थे। संन्यासी उनसे इतने प्रभावित थे कि उन्हें खुद की परवाह नहीं होती थी, वे बीमारी के बावजूद भी काम करते रहते थे। उन्हें रात में सोने में भी कठिनाई होती थी। देखते ही देखते कई संन्यासी बुखार, और इंफेक्‍शन से पीड़ित हो गए थे। इसकी मुख्य वजह आश्रम में चारों तरफ गंदगी का अंबार होना था। इन सबके बावजूद मां आनंद लिखती हैं कि भगवान ओशो को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और वे भक्तों को सेक्स की इच्छा नहीं दबाने के लिए कहते रहते थे। उनकी बातों से आश्रम के संन्यासी बेफिक्र होकर ऐसा करते थे।

शीला ने किया था यह भी खुलासा

शीला ने आगे किताब में जिक्र किया है कि मुझे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि सारा दिन काम करने के बाद भी संन्यासी सेक्स के लिए उर्जा और समय निकाल लेते ‌थे। शीला आगे लिखती हैं एक दिन उन्होंने एक संन्यासी से पूछा, तो उसका कहना था कि वो हर दिन ‌तीन अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है।

96 कारें थीं रजनीश के पास

आनंद शीला के अनुसार एक दिन ओशो ने उनसे एक माह में 30 नई रॉल्स रॉयस गाड़ियों की मांग की थी, जबकि उनके पास 96 कारें पहले से थीं। ओशो को ये नई कारें बोरियत मिटाने के लिए चाहिए थीं। इन कारों को खरीदने के लिए लगभग 3 से 4 मिलियन डॉलर चाहिए था। इतनी बड़ी रकम खर्च में कटौती करके जुटाई जा सकती थी। लेकिन, ओशो ने पैसों के लिए 50-60 लोगों के नाम अपने शिष्या को दिए थे जो काफी धनी थे।


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