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धान के बाद गेहूं की फसल भी भरेगी किसानों का भंडार

सब कुछ अच्छा रहा तो धान की तरह गेहूं के दाम भी तोड़ेंगे रिकॉर्ड।

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रायसेन. जिले में धान की अच्छी पैदावार और फिर रिकॉर्ड दाम मिलने के बाद अब किसान गेहूं की फसल से भी उम्मीदें लगा रहा है। खेतों में खड़ी फसल भी अच्छी पैदावार का संकेत दे रही है, उस पर गेहूं के बढ़ते दाम किसानो को खुश कर रहे हैं। बाजार का यही रुख रहा तो इस बार गेहूं के दाम भी धान की तरह अच्छे मिलने की पूरी संभावना है। सब कुछ उम्मीद के मुताबिक हुआ तो किसानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। गेहूं की उपज किसानों का भंडार भरेगी और इससे बाजारों में भी रौनक बढ़ेगी। जो बीते तीन-चार सालों के नुकसान की भरपाई करेगी। इसी उम्मीद में किसानों गेहूं पर भरोसा किया है और यही कारण है कि जिले में गेहूं का रकबा बीते सालों की तुलना में इस बार ज्यादा है। अभी तक हुई गिरदावरी के अनुसार कृषि विभाग के लक्ष्य से भी अधिक रकबा में गेहूं की बोवनी हुई है। इस वर्ष जिले में लगभग 02 लाख 88 हजार हैक्टेयर में गेहूं की बोवनी की गई है। कृषि विभाग का लक्ष्य 02 लाख 70 हजार हैक्टेयर था। सबसे अधिक रकबा रायसेन तहसील क्षेत्र में तथा सबसे कम उदयपुरा और बाड़ी क्षेत्र में है।
धान की तरह गेहूं के दाम भी मंडियों में अच्छे रहे तो समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र, धान खरीदी केंद्रों की तरह सूने रह सकते हैं। वर्तमान में रायसेन मंडी में गेहूं का भाव 2800 रुपए प्रति क्विंटल के आस-पास चल रहा है। जबकि समर्थन मूल्य 2115 रुपए प्रति क्विंटल है। यह अनुमान लगाना आसान है कि अच्छी गुणवत्ता का गेहूं मंडियों में ही बिकेगा और दाम भी अच्छे मिलेंगे। बाजार और कृषि से जुड़े विशेषज्ञ भी यह संभावना जता रहे हैं कि इस साल मंडियों में गेहूं का रेट अच्छा रहने वाला है। हालात भी कुछ ऐसे ही बन रहे हैं।
विदेशों में बढ़ती मांग है कारण
विशेषज्ञ बताते हैं कि विदेशों में भारत से चावल के साथ अब गेहूं की मांग भी बढ़ी है। इसका कारण यूक्रेन-रूस के बीच चल रहा युद्ध है। इन दोनो देशों में बड़े पैमाने पर गेहूं की खेती होती है। युद्ध के चलते वहां से गेहूं का निर्यात अन्य देशों में नहीं हो पा रहा है, इसलिए बाकी देश भारत की तरफ देख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनाज के आयात-निर्यात से जुड़े व्यापारियों की इस पर नजर है। यही कारण है कि धान के बाद अब गेहूं के दाम भी बढऩे की पूरी संभावना है। किसानों के लिए यूक्रेन-रूस का युद्ध आपदा में अवसर की तरह साबित हो रहा है।
अन्य जिलों में भी असर
केवल रायसेन ही नहीं, नजदीकी जिला विदिशा, सीहोर, राजगढ़ में भी गेहूं के दाम बढ़े हैं। विदिशा और सीहोर की मांग पहले ही देश-विदेश में रही है। यहां अभी गेहूं के दाम तीन हजार के आस-पास चल रहे हैं। इन जिलों के साथ रायसेन के अच्छी गुणवत्ता के गेहूं की कीमत भी कदमताल करेगी।
यहां इतना गेहूं का रकबा
तहसील रकबा (हैक्टेयर में)
रायसेन 55059
गैरतगंज 30456
बेगमगंज 41413
सिलवानी 32668
उदयपुरा 16316
बरेली 35334
बाड़ी 16605
गोहरगंज 41269
सुल्तानपुर 12293
देवरी 7178
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इनका कहना है
जिंस के दाम मांग पर निर्भर करते हैं। वर्तमान हालातों में विदेशों में भारत के चावल और गेहूं की मांग बढ़ी है। व्यापारी विदेशों से एडवांस बुकिंग कर रहे हैं, इसलिए फसल आने से पहले ही दाम बढऩे लगे हैं। धान के समय भी ऐसा ही हुआ है। यह हमारे किसानों के लिए सुखद है।
आरपी शर्मा, सचिव कृउमं रायसेन
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गेहूं के दो बड़े उत्पादक देश यूक्रेन और रूस के बीच लंबा युद्ध चलने से यह स्थिति बन रही है। हमारे गेहूं और चावल की मांग बढ़ी है। इसका लाभ किसानों को मिलना तय है। अच्छी गुणवत्ता की उपज को दाम भी अच्छे मिलेंगे।
स्वप्रिल दुबे, कृषि विशेषज्ञ
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डिमांड लाइन बड़ी है, उसकी पूर्ति के लिए प्रतिस्पर्धा है। यही कारण है कि धान की तरह गेहूं के दाम भी बढ़ेंगे। इस बार कमजोर गुणवत्ता की उपज को भी उम्मीद से ज्यादा दाम मिलेंगे। विदेशों के साथ देश में भी मांग ज्यादा है।
मनोज सोनी, अनाज व्यापारी रायसेन
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