
11 करोड़ से बनने वाली पक्की नहर अभी भी कच्ची
रायसेन/सुल्तानगंज। जहां प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए तालाब, नहर की सुविधा उपलब्ध कराकर बंजर भूमि को सिंचित बनाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए जिम्मेदार अधिकरियों की लापरवाही से योजनाओं को पलीता लग रहा है। जिम्मेदार अधिकारी एवं ठेकेदारों की लापरवाही से क्षेत्र में छह साल बाद भी नहरों का निर्माण नहीं हो सका है। ११ करोड़ की योजना को मिलीभगत से पलीता लगाया जा रहा है। छह साल बाद भी नहरों का निर्माण नहीं हो सका है। बारिश होते ही ये कच्ची नहरें छतिग्रस्त हो जाती हैं। जिनसे खेतों में पानी भरता है।
नष्ट हो रहे गड़े
धान की खेती के लिए किसानो ने अपने खेतों में हजारों रुपए खर्च कर गड़े बनवाए थे। लेकिन बारिश होते ही नहरों के फूटने से तेजी से खेतों में पानी भरने के कारण किसानो के गड़े छतिग्रस्त हो गए। कई किसानो को इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानो में संबंधित विभाग के अधिकारियों के प्रति नाराजगी है। सुल्तानगंज के बंजर भूमि अंचल के बिलखेड़ा जागीर, बोरिया टपरा, सिहोरा, खमरिया, बेरसला आदि को सिंचित बनाने के लिए बनाई गई साजखेड़ा जलाशय परियोजना में जमकर अधिकारियों के मौन संरक्षण में निर्माण कार्यों में भारी लापरवाही बरती जा रही है। योजना के तहत बनाई जा रही नहर छह साल में भी नहीं बन सकी है।
मोबाइल से चल रहा काम
जलाशय योजना की मॉनीटरिंग के लिए जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ मोबाइलों पर ही जानकारी लेते रहते हैं। कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता। जिससे ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहा है। हालात ये हैं कि नहर के लिए खोदी गई नाली बारिश के पानी में बदल गई है। कई जगह खेतों में पानी का बहाव हो जाने से नहर गायब हो गई है। नगर के निर्माण में इस तरह की लापरवाही से किसानों में रोष व्याप्त है। नहरों का निर्माण गुणवत्ताहीन किया जा रहा है। मसूर बावरी, देवलापुर, चदौड़ा क्षेत्र में बारिश के दौरान ही निर्माण किया गया, जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से की, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा।
लापरवाही के लगाए आरोप
पीडि़त किसान विजेंद्र साहू, प्रकाश, सुदामा, राजकुमार, रामगोपाल, नारायण, उदयभान, करोड़ी लाल, चेतराम, लाल साहब, कल्लू प्रजापति, गुड्डू साहू, बिहारी, लखन, प्रेम भाई, मोहन, रवि आदि किसानों का कहना है कि नहर ठेकेदार द्वारा निर्माण में मनमानी की जा रही है। जबकि अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। समय रहते योजना का काम पूरा नहीं किया, अब बारिश में काम किया जा रहा है। जिसकी गुणवत्ता घटिया है। खास बात ये भी है कि जल संसाधन विभाग द्वारा इन तीनों परियोजना में कहीं भी सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। जिससे ज्ञात हो कि कितनी राशि किस मद में खर्च की गई है और किसानों की कितनी भूमि का प्रयोग जलाशय योजना एवं नहर निर्माण में किया गया। कार्य आरंभ दिनांक से पूर्ण दिनांक दिनांक तक की कोई जानकारी नहीं है।
मुझे आपके द्वारा जानकारी प्राप्त हुई है,जल्द से जल्द नहर को सुधारा जाएगा। ठेकेदार को गुणवत्तापूर्ण निर्माण के निर्देश दिए गए हैं। कहीं कोई कमी है तो उसे सुधारा जाएगा।
एसएच प्रजापति, इंजीनियर सजखेड़ा जलाशय परियोजना
Published on:
02 Jul 2018 04:42 pm
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