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पाकिस्तान के बाद रायसेन के बाड़ी में विराजमान है मां हिंगलाज

विश्व की दूसरी शक्ति पीठ माँ हिंगलाज बाड़ी में नो दिन लगा रहता है भक्तों का तांता , नवरात्रि आज से शुरू।

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बाड़ी/रायसेन। बाड़ी में नवरात्रि पर्व शुरू होते ही प्रतिदिन रात 4 बजे से हजारों लोगों का जल चढ़ाने का सिलसिला लगातार 9 दिन तक चलता रहता है और यहां पर नगर के अलावा गांव नगर हो महानगरों और देश के प्रदेश के कानों से श्रद्धालु आते हैं क्योंकि लोगों का मानना है कि भारतवर्ष में बाड़ी नगर में ही महिला शक्तिपीठ है इसके अलावा बलूचिस्तान पाकिस्तान में मौजूद।

पाकिस्तान में होता है नानी का हज
विश्व में माँ हिंगलाज पाकिस्तान के प्रसिद्ध बिलुचिस्तान में माँ हिंगलाज ज्योति रूप में बिराजमान हैं। माँ के भक्त उन्हें नानी कहकर पुकारते हैं और नानी के हज की प्रसिद्धि भारत में ही नहीं विश्व में फैली हुई है। यानी नानी के हज की इच्छा रखने बाला मानव समय पूर्व ही माँ की कृपा का पात्र बन जाता है। ज्योति रूप में माँ का स्वरूप काफी निराला हे भक्तों की आँखों की ज्योति बनी नानी हर भक्त की मनोकामना पूर्ण करती है।

बाड़ी में दूसरा शक्तिपीठ
दूसरा शक्ति पीठ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का भोजपुर विधान सभा क्षेत्र का ह्रदय स्थल बाड़ी के दुसरे छोड़ बाड़ी कला में विन्धयाचल की तल हटी में बसा हुआ है रामजानकी खाखी अखाडा मंदिर की बगिया में विराजमान ममता मई माँ हिंगलाज का मनमोहक दरबार लगा हुआ है खाकी अखाडा मंदिर की गादी पर विराजमान बिहंग महंत संत भगवान दास जी महाराज भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम के परम भक्त थे।

ऐसे मानी मां
बिहंग महंत संत भगवान दास महाराज के मन में जन पीड़ा और भक्तों के संकट को देखकर शक्ति उपासना की इच्छा जागृत हुई। इस इक्छा को पूरी करने के लिए संत ने रात दिन चिंतन मनन किया। संत को दुःखी देखकर मंदिर परिषर में उपासना करने बाले नागाओं के भीतर ब्याकुलता छा गई। नागाओं को अपने मन की इक्छा बताकर संत ने वन गमन कर दिया। कई दिनों तक घनघोर जंगलों में भटके और एक स्थान को देखकर धुनी रमा ली। संत के दृढ़ विस्वास को देखकर महाशक्ति का आसन डगमगा गया। माँ ने अपने भक्त की इच्छा पूरी करने के लिए अभोद बालिका का रूप धारण किया।

ऐसे बना मां का मंदिर
मां के प्रकट होने के बाद तपस्वी संत ने जनकल्याण के लिए माँ से आशीर्वाद माँगा। तब माँ ने जमीन से कंडी उठाकर उसमे अग्नि प्रकट की और संत के हाथ में थमा दी। माता बोली प्रत्यक्ष रूप से मेरे आकार की मूर्ती स्थापित कर मूर्ती पूजन की आज्ञा दे दी। संत भगवान दास जी महाराज माँ हिंगलाज को हांथी गेट के अंदर मंदिर परिषर में स्थापित करना चाहते थे, लेकिन गेट के बाहर ही कंडी गिर जाने से माँ की ममता मई मूर्ती की स्थापना करदी जो आज भव्य मंदिर के रूप में जगजाहिर है। इस मंदिर की किवदंति है जो माँ हिंगलाज के दर्शन के लिए भक्त जाते हैं बो आते जाते संत भगवान दास जी महाराज के जयकारे लगाते हैं।