
Memoirs related to Atal ji: आज भी प्रेरित करते हैं उनके शब्द
रायसेन. अटलजी के शब्द आज भी कानो में गूंजते हैं। उन्होंने कहा था कि चुनाव के बहाने ही सही, लेकिन अंतिम छोर तक के व्यक्ति तक पहुंचना है। उनके दुख और तकलीफों को समझना है। राजनीति में सेवा का भाव ही सर्वोपरि हो। परिणाम की चिंता नहीं बल्कि यह इस सोच से काम करें कि हर व्यक्ति तक पहुंचकर उसके सुख-दुख में शामिल होना है। तभी हम अपने सपनों का भारत का सपना साकर कर सकते हैं।
वर्ष 1991 में रायसेन-विदिशा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़े अटल बिहारी बाजपेयी आज दुनिया से चले गए, लेकिन उनके ये शब्द चुऩाव के दौरान प्रचार और व्यवस्थाओं में लगे कार्यकर्ताओं को आज भी याद हैं। उनकी राजनीति कला के लोग आज भी दिवाने है। आज अगर कोई राजनीति में आने चाहे तो उसकी पहली कोशिश होती है कि वह अटल जी जैसा राजनीतिज्ञ बनें। रायसेन के वरिष्ठ भाजपा नेता हरिनारायण सक्सेना और सुल्तानपुर के वरिष्ठ नेता सुरेश श्रीवास्तव ने अटल जी को याद करते हुए उनके कई संस्मरण सुनाए।
सक्सेना ने बताया कि अटल जी राजनीतिक होने के साथ कार्यकर्ताओं का भी विशेष ध्यान रखते थे। हर छोटे बड़े कार्यकर्ता को महत्व देना उनकी खासियत थी। उनके आस पास रहने वालों लोगों के साथ वे बिल्कुल परिवार के सदस्य की तरह रहते थे। उनसे बात करने में कभी नहीं लगा कि वे इतने बड़े नेता है। उनकी वाक् शैली बहुत ही प्रभारी थी, जो सभी को प्रभावित करती थी।
श्रीवास्तव ने बताया कि पहली बार जब वे चुनाव प्रचार के सिलसिले में सुल्तानपुर पहुंचे, तो ऐसा नहीं लगा कि इतने बड़े और प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार से बात कर रहे हों। वे सभी से आम इंसान की तरह ही मिलते थे। वे हर कार्यकर्ता से ऐसे मिले जैसे वर्षों से परिचित हों, सालों पुराना रिश्ता हो। उन्होंने कहा कि था कि जात-पात का भेदभाव रहित मानव सेवा ही पार्टी की सेवा है।
Published on:
17 Aug 2018 10:42 am
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