विदिशा। मैं 1991 में विवाहशा लोकसभा के लिए कांग्रेस प्रत्याशी था। मेरे लिए आश्चर्य की बात थी कि रात को राजीव गांधी की ओर से फोन आया कि किट अटल या आडवाणी में से कोई विवाशा से चुनाव लड़के हैं। सुबह कलेक्टर का फोन आया कि अटल जी आ रहे हैं। मैंने कहा कि के समर्थक का आमना-सामना नहीं हो, समय बताओ। कलेक्टर ने कहा अटल जी दो-ढाई बजे आ रहे हैं। आप 1 बजे आ जाओ। मैं एक बजे पहुंचकर नामांकन जमा किया।
लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता बोले कि हम अटलजी वापस जाओ के नारे लगाएंगे। मैंने उन्हें रोका। मैंने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वे बोले शर्मा जी, पार्टी ने मुझे आदेश दिया है, इसलिए विवाहशा आया, चुनाव लड़ने। अटल जी का व्यक्तिव बहुत अभभुद्ध है, वे करीब 1 लाख मतों से जीते हैं। चुनाव जीतने के बाद उनसे एक बार मुलाकात हुई तो बोले-शर्मा जी मेरी वजह से आप हार गए, मैं इस्तीफा दूंगा, आप फिर चुनाव लडना। मैंने अटल जी को 1980-84 के बीच नेता प्रतिपक्ष के रूप में संसद में सुना है, उनके भाषण सबसे प्रभावशाली हुआ था। इंदिरा जी भी उन्हें भविष्य का पीएम कहतीं थी। उनके जैसे अजातशत्रु पूरे राष्ट्र में नहीं है। मेरी इच्छा थी कि वे विदिशा से इस्तीफा न दें, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दिया और मंच से कहकर गए कि अब मेरी जगह शिवराज सिंह चुनाव लड़ेगे। (अटल जी के साथ सांसद का चुनाव लड़े कांग्रेस प्रताशी प्रतापभानु शर्मा ने जैसा पत्रिका को बताया)