
private schools
सुल्तानपुर। जहां एक तरफ बढ़ती महंगाई से आम नागरिक परेशान हैं तो वहीं दो वर्ष के बाद शुरु हुए प्राइवेट स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों की कमर तोड़ने की ठान ली है। क्योंकि स्कूल फीस, बस फीस, ड्रेस सभी पर लगभग 30 से 40 प्रतिशत राशि की बढ़ोतरी प्राइवेट संस्थाओं ने की है। प्राइवेट स्कूल से ड्रेस और किताबों को कमीशन के आधार पर किसी एक संस्थान को ठेका देकर एक दाम तय कर दिया जाता है। फिर अभिभावकों से मनमर्जी की रकम वसूली जाती है। किताबों एवं कापी के ऊपर अंकित दर के हिसाब से वसूली जा रही। यदि अगर देखा जाए तो नर्सरी से लेकर मिडिल क्लास तक के बच्चों की ड्रेस 500 से लेकर 1000 रुपए तक है। जिसमें सप्ताह में दो ड्रेस अनिवार्य की गई हैं। कोर्स की बात की जाए तो पुस्तकें एवं कॉपी मिलाकर 3500 रुपए से लेकर 9000 रुपए तक बिल बन रहा है।
प्राइवेट स्कूल नगर से दो-तीन किलोमीटर दूर होने के कारण स्कूली बसों से अनिवार्य रुप से आना-जाना रहता है, जिसमें नगर सुल्तानपुर की दर 6000 रुपए और स्कूल फीस 12000 से 15000 रुपए के बीच रखी गई है। इन सब को मिला लिया जाए तो एक बच्चे का खर्च लगभग 30000 रुपए प्रति वर्ष आ रहा है। इतनी बड़ी रकम आम आदमी की पकड़ से दूर है। यदि बीपीएल कार्ड धारक की बात की जाए तो लगभग 15000 सालाना खर्च एक बच्चे का बैठता है।
स्कूलों ने नहीं जारी किया कैलेंडर
वहीं राजधानी भोपाल में दो साल बाद अब देश में लगभग सभी स्पोर्ट्स एक्टिविटीज शुरू हो चुकी हैं। लेकिन सीबीएसई स्कूलों में खेल की गतिविधियां अब भी ठप हैं। सीबीएसई बोर्ड ने तो अभी तक अपना स्पोर्ट्स कैलेंडर भी जारी नहीं किया है। राजधानी के अभिभावकों और छात्रों ने सीबीएसई के चेयरमैन और केंद्रीय खेल मंत्री को ई-मेल कर जल्द ही खेलकूद की गतिविधियां शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया है। क्योंकि, बीसीसीआई व एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया सहित देश के अधिकांश खेल संगठनों की खेल प्रतियोगिताएं शुरू हो चुकी हैं। हाल ही में खेलो इंडिया यूथ खेलो का सफल आयोजन भी हुआ। साथ ही अखिल भारतीय विश्वविद्यालयीन खेलकूद भी शुरू हो चुके हैं।
आर्मी स्कूल के पीटीआई विवेक गौड़ ने बताया कि देश में सीबीसीएई के 7 जोन हैं। इसमें एक गल्फ देश का जोन भी है। जबकि इसके देश में 16 क्लस्टर हैं। सीबीएसई पहले क्लस्टर टूर्नामेंट करवाता है। इसके बाद जोन की टीमों के बीच टूर्नामेंट होते हैं। इसमें प्रदर्शन के आधार पर खिलाडिय़ों को नेशनल लेवल पर भागीदारी करने का अवसर मिलता है। जिसमें गल्फ देशों की स्कूल की टीमें भी भाग लेती हैं। जिससे खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल मिलता है।
स्कूल नेशनल गेम्स का आयोजन करवाने वाली स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) की मान्यता को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है। इसमें भी दो गुट बने हुए हैं। दोनों अपने को सही बता रहे हैं। एक ने तो साल 2021 में स्कूल नेशनल गेम्स का शेड्यूल भी जारी कर दिया था।
Published on:
10 Jul 2022 04:56 pm
बड़ी खबरें
View Allरायसेन
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
