
आदर्श चरित्र का निर्माण श्रीराम चरितमानस से ही हो सकता है: रामस्वरूप आचार्य
सिलवानी. नगर में पहली बार श्रीराम कथा की अमृत वर्षा कथावाचक जगद्गुरू स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज चित्रकूट धाम के श्रीमुख से हैलीपेड ग्राउंड में शनिवार को कलश यात्रा के साथ प्रारम्भ हुई। कलश यात्रा के प्रारंभ में श्रीराम जानकी मंदिर जमुनियापुरा में स्वामी रामस्वरूपाचार्य, ब्रहमचारी महाराज मांगरोल, मानस रत्न अशोकदास रामायणी अयोध्याधाम, महंत नागा रामदास महाराज, नगर खेरापति नरेश शास्त्री ने श्रीराम दरबार की पूजा अर्चना कर परिक्रमा की। गाय की पूजन कर गौग्रास खिलाया। तत्पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश पूजन की गई।
यात्रा में रथ पर श्रीराम जानकी दरबार, सहित सभी संत महात्माओं को अलग अगल विराजमान कर कलश यात्रा प्रारंभ हुई। पीले वस्त्र और लाल चुनरी धारण किए हुए महिलाएं और कन्याएं सिर पर कलश और नारियल धारण किए हुए कलश यात्रा के लिए निकली। शहनाई, ढोल, डीजे की धुन पर युवा भक्तिमय रंग में झूमते गाते चल रहे थे। वहीं डोन कैमरों से यात्रा पर पुष्पा वर्षा की गई। पूरा नगर यात्रा के समय भक्तिमय वातावरण में रम गया। श्रीराम कथा की आयोजक हिन्दू उत्सव समिति, हिन्दू समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता कलश यात्रा के दौरान सक्रिय रहे। वही पुलिस द्वारा सुरक्षा एवं व्यवस्था के लिए मुस्तैद रही।
चरित्र के निर्माण से जीव भगवान राम को पा सकता है
स्वामी रामस्वरूप आचार्य ने श्रीराम कथा की महिमा बताते हुए कहा कि रामचरित मानस सनातन धर्म का आदर्श ग्रंथ है, जिसमें आदर्श, चरित्र, मानवता की सारी कार्यशैली परिलक्षित होती है। आदर्श चरित्र का निर्माण श्रीराम चरितमानस से ही हो सकता है। रामचरित मानस मनुष्य को हमेशा से ही भक्ति के माध्यम से भगवान को पाने की लगन रहती हैं। मनुष्य के हृदय में इच्छा रहती है के राम मिल जाए यदि मनुष्य राम को पाना चाहता तो रामचरित मानस को पढ़कर स्वयं भगवान राम के चरित्रों को अनुसरण करके अपने चरित्र का निर्माण कर सकता है। भगवान राम को भी पा सकता है, भगवान की कृपा से इस आयोजन में हनुमानजी महराज ने विशेष कृपा की है। चरित्र का निर्माण करना चाहते हो तो रामायण पढ़कर भगवान की सेवा में रहकर करो, भगवान राम जी मिल जाएंगे। हनुमानजी का चरित्र जैसा महान नहीं है कोई। हनुमानजी ने राम जी से कहा मुझमें अवगुण ही अवगुण है में दीन हूं आपदीन बंधु है। मनुष्य के जीवन में चरित्रता और दीनता होनी चाहिए मनुष्य के जीवन में सरलता दया दीनता भक्ति होनी चाहिए। रामचरित मानस की कथा इसलिए सुनी जाती जिससे लड़कों और लड़कियों के चरित्र का निमार्ण हो सके। मां जब रामायण पढ़ेगी तब वह अपने बच्चों को शिक्षा दे पाएगी, सानातन संस्कृति में रहने वाले हो तो तुलसीदल और तुलसीकृत होना चाहिए। तुलसीकृत रामायण पढ़ो और अपने चरित्र का निर्माण करो। कथा को ब्रहमचारी महाराज मांगरोल, अशोकदास रामायणी ने भी संबोधित किया गया। मंच संचालन नगर खेरापति नरेश शास्त्री द्वारा किया गया।
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Published on:
18 Dec 2021 09:23 pm
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