
नाग वंश से जुड़ा है यह क्षेत्र
कमल याज्ञवल्क्य, खरगोन. अंचल का संबंध नाग युग्म प्रतिमाओं के कारण नाग वंश से जोड़ा जाता है। आस-पास के गांवों में नाग नागिन के जोड़े वाली प्राचीन प्रतिमाएं इसके प्रमाण हैं। खास बात यह है कि जोड़े में नाग-नागिन की अति प्राचीन युग्म प्रतिमाएं प्राचीन मंदिरों के आसपास और दीवारों में लगी हैं। ख्यातिप्राप्त इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता डॉक्टर नारायण व्यास भी इसकी पुष्टि करते हैं कि इस क्षेत्र का संबंध नागवंश से रहा है। नागपंचमी के पर्व पर खरगोन सहित अंचल के गांवों में पारंपरिक रूप से नाग पूजा की परंपरा भी इसका प्रमाण है। इसके अलावा घरों की दीवारों पर भी शुद्ध घी से नाग परिवार बनाकर पूजा की जाती है। घरों के बाहर नियत स्थान पर मिट्टी के दीपक में दूध रखने की भी परंपरा है।
करते हैं अखाड़ी मंत्र सिद्ध
नागपंचमी की रात में गांवों में एक निश्चित स्थान पर भगवान नागचंद्रेश्वर की पारंपरिक रूप से सामूहिक पूजा होती है। पूजा से जुड़े पंडित नरहरि शर्मा बताते हैं इस विशेष पूजा में जो बिष खडिय़ा शामिल होते हैं वह सभी मिलकर पहले नाग देवता की पारंपरिक रूप से पूजा करते हैं और एक दूसरे से मंत्रों को साझा करते हुए सिद्ध करते हैं। इसके अलावा घरों में भी भाव सहित नाग देवता की पूजा की जाती है।
यह भी परंपरा, नहीं बनाते रोटी
अंचल के गांवों में ऐसी परंपरा है कि नाग पंचमी पर रोटी नहीं बनाई जाती और ना ही खीर बनाई जाती है। इस दिन घरों में पूरी या बाटी बनाई जाती है। इसके पीछे भी पुरानी परंपरा का हवाला दिया जाता है।
नागवंश से रहा है संबंध
- रायसेन जिले का संबंध नागवंश काल से रहा है। जिले के कई स्थानों और खरगोन सहित कई गांवों में प्राचीन नाग युग्म प्रतिमाएं हैं, जो नौवीं शताब्दी के लगभग की हैं। इससे प्रमाणित होता है कि इस क्षेत्र का संबंध नागवंश से रहा है।
डॉक्टर नारायण व्यास, पुरातत्वविद और इतिहासकार
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Published on:
12 Aug 2021 09:36 pm
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