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लॉकडाउन में गई नौकरी तो गांव आकर लगाया सब्जी का ठेला

हर दिन पांच गरीबों को देते हैं मुफ्त सब्जी।

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लॉकडाउन में गई नौकरी तो गांव आकर लगाया सब्जी का ठेला

लॉकडाउन में गई नौकरी तो गांव आकर लगाया सब्जी का ठेला

सत्यवान गोस्वामी, सुल्तानगंज. यदि हौसला है तो किसी भी संकट का सामना किया जा सकता है। रोजगार का एक अवसर हाथ से निकल जाए तो दूसरी राह भी मिल सकती है। यह साबित किया है दीपेश साहू ने। सुल्तानगंज निवासी दीपेश भोपाल के एम्स अस्पताल में सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते उनकी नौकरी छूट गई। मजबूरी में उन्हे अपने घर वापस आना पड़ा, उन पर आठ सदस्यों के परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी है। लेकिन साहू ने हिम्मत न हीं हारी। दो दिन में ही उन्होंने अपना खुद का रोजगार करने का निर्णय लिया और गांव में ही घर-घर जाकर सब्जी बेचने का काम शुरू किया। एक हाथ ठेला लेकर सब्जी का धंधा शुरू कर दिया। पहले ही दिन से यह काम चल निकला और दीपेश अब इस काम में भी खुश है।
दीपेश ने बताया कि संकट में भी साहस से परिवार का भरण पोषण किया जा सकता है। साथ में समाज सेवा भी कर लेते हैं। वो हर दिन 5 गरीब लोगों को मुफ्त सब्जी देकर उनकी मदद कर रहे हैं। सब्जी की दुकान से दिनभ में लगभग पांच सौ रुपए की कमाई हो जाती है।
लगभग दो हजार युवा वापस लौटे
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के ८० गांवों के लगभग दो हजार युवा लॉकडाउन के कारण भोपाल, इंदौर, दिल्ली, जबलपुर आदि शहरों से वापस लौटे हैं। जो शहरों में फैक्ट्रियों, शो रूम, मॉल आदि में नौकरियां करते थे। ये युवा अब गांवों में ही रोजगार की तलाश में हैं। कुछ परिवार की खेती किसानी का काम देखने लगे हैं कुछ अन्य काम कर रहे हैं।
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